Godrej Palm Retreat Penalty: सेक्टर-150 में गोदरेज पाम रिट्रीट-1 पर 10 लाख की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति, ग्रैप नियमों की खुली अवहेलना
नोएडा में बढ़ते वायु प्रदूषण और ग्रैप (GRAP) के पहले चरण के लागू होने के बावजूद निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के मानकों की अनदेखी करने वाली बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों पर प्रदूषण विभाग का शिकंजा कस गया है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के क्षेत्रीय कार्यालय ने सेक्टर-150 स्थित निर्माणाधीन आवासीय परियोजना ‘गोदरेज पाम रिट्रीट-1’ पर पर्यावरणीय नियमों के घोर उल्लंघन के आरोप में 10 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की आधिकारिक संस्तुति की है। क्षेत्रीय अधिकारी ने इस संबंध में विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर अंतिम मंजूरी के लिए मुख्य पर्यावरण अधिकारी, लखनऊ को भेज दी है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ऋतेश कुमार तिवारी ने बताया कि 21 अक्टूबर को विभागीय प्रवर्तन दल ने सेक्टर-150 स्थित गोदरेज पाम रिट्रीट परियोजना का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान निर्माण स्थल पर गंभीर खामियां पाई गईं। परियोजना परिसर में बेसमेंट और पिलर की खुदाई से निकली हजारों टन मिट्टी और निर्माण सामग्री बिना किसी ग्रीन नेट या तिरपाल के खुले आसमान के नीचे रखी मिली। इस खुली मिट्टी के कारण तेज हवा चलने और भारी वाहनों के गुजरने पर आसपास के समूचे क्षेत्र में धूल का घना गुबार उड़ रहा था, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था।
जांच में यह भी उजागर हुआ कि परियोजना परिसर में धूल को दबाने के लिए चार एंटी-स्मॉग गन स्थापित तो की गई थीं, लेकिन वे सभी पूरी तरह बंद पड़ी थीं और उन पर धूल की मोटी परत चढ़ी हुई थी। इसके अलावा मुख्य सड़क पर वाहनों के पहियों को धोने के लिए अनिवार्य ‘टायर वॉशिंग सिस्टम’ और वास्तविक समय में प्रदूषण मापने वाले ‘पीएम सेंसर’ भी नदारद पाए गए। बोर्ड के अनुसार, इससे पूर्व 30 सितंबर को भी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्देशों के उल्लंघन पर कंपनी को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन प्रबंधन ने उसका कोई जवाब नहीं दिया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों के आधार पर 10 लाख का जुर्माना लगाने की संस्तुति करते हुए जिलाधिकारी और नोएडा प्राधिकरण को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रतिलिपि भेजी गई है।
