Lucknow : योगी सरकार का माइक्रोबायोम प्लान तैयार, स्वास्थ्य से खेती तक होगा फायदा

Lucknow : योगी सरकार ने प्रदेश में साइंस और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने के लिये एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इस ड्राफ्ट में माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजी पर जोर दिया गया है। इसका इस्तेमाल अस्पतालों में संक्रमण की निगरानी, एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस यानी रोगाणुरोधी दवाओं के प्रति सूक्ष्मजीवों की प्रतिरोधक क्षमता की पहचान, जल प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।

योगी सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश स्टेट स्पेसिफिक नोट ऑन माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजीज’ ड्राफ्ट में तकनीक को स्वास्थ्य, स्वच्छ जल, स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि से जोड़ने की सिफारिश की है। इसकी शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के कुछ चुनिंदा संस्थानों से की जाएगी। वहीं इसके सफल परिणाम के बाद इसे विस्तार दिया जाएगा।

माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजी के विकास में बायोटेक पार्क और यूपीपीपीसी का होगा अहम रोल
उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल की सीईओ कृतिका शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा साइंस एवं टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर स्वास्थ्य क्षेत्र समेत अन्य क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में सीएम योगी की मंशा के अनुरुप ड्राफ्ट को तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि जल्द ही ड्राफ्ट को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री से अनुमति मिलने के बाद ड्राफ्ट को धरातल पर उतारने की दिशा में काम शुरू कर दिया जाएगा। काउंसिल की सीईओ ने बताया कि माइक्रोबायोम टेक्नोलाॅजी को विकसित करने के लिये विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के साथ स्वास्थ्य, कृषि, उद्यान, नगर विकास, जल एवं स्वच्छता तथा प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभागों का सहयोग लिया जाएगा। इसके अलावा इसमें लखनऊ स्थित बायो-टेक्नोलॉजी पार्क और उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल (यूपीपीपीसी) को अहम भूमिका होगी। माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजी को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। पहले तीन महीनों में उपलब्ध प्रयोगशालाओं की क्षमता का आकलन, संबंधित विभागों से परामर्श और उपयुक्त पायलट स्थलों का चयन किया जाएगा। इसके बाद चौथे से बारहवें महीने के दौरान अस्पतालों में संक्रमण की निगरानी, अपशिष्ट जल के परीक्षण और कृषि से जुड़ी परियोजनाओं पर काम किया जाएगा। वहीं तेरहवें से चौबीसवें महीने में विभिन्न मौसमों और फसल चक्रों के आधार पर परिणामों का मूल्यांकन कर सफल प्रयोगों का विस्तार किया जाएगा।

माइक्रोबायोम तकनीक से स्वास्थ्य, नदी की स्वच्छता और टिकाऊ कृषि को मिलेगा प्रोत्साहन
विषय विशेषज्ञ डॉ. जीएन सिंह ने ड्राफ्ट में सरकारी और चयनित निजी अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संक्रमण और एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस की निगरानी का सुझाव दिया है। इसके तहत पारंपरिक प्रयोगशाला जांच के साथ जरूरत के अनुसार लक्षित आनुवंशिक परीक्षण और डीएनए सीक्वेंसिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे संक्रमण फैलने के संभावित कारणों और दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने वाले तंत्र की पहचान में मदद मिलेगी। गंगा, यमुना और गोमती नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में उपचार आधारित पायलट परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि जल शोधन संयंत्रों में पहले से मौजूद सूक्ष्मजीव समुदायों की कार्यक्षमता का आकलन किया जा सके और जरूरत के अनुसार वायु संचार, पोषक तत्वों के संतुलन और जहरीले पदार्थों के प्रवेश जैसी स्थितियों में सुधार कर जैविक उपचार की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाएं तलाशी जा सकेंगी। इससे गंगा, यमुना और गोमती के प्रदूषण को कम किया जा सकेगा और जल प्रदूषण नियंत्रण और अपशिष्ट प्रबंधन को नई दिशा मिलेगी। इसके साथ ही ड्राफ्ट में कृषि क्षेत्र में भी टेक्नोलॉजी के परीक्षण पर जोर दिया गया है ताकि फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।

क्या है माइक्रोबायोम
माइक्रोबायोम सूक्ष्मजीवों के ऐसे समुदाय को कहा जाता है, जिसमें बैक्टीरिया और फंगस जैसे जीव तथा उनके आसपास का जैविक परिवेश शामिल होता है। ये सूक्ष्मजीव मनुष्य, मिट्टी, पानी, फसलों और निर्मित वातावरण में मौजूद रहते हैं। कुछ सूक्ष्मजीव बीमारियों का कारण बनते हैं, जबकि कई पाचन, मिट्टी की उर्वरता और जैविक अपशिष्ट के विघटन जैसी उपयोगी प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाते हैं।

Hot this week

Topics

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img