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Noida Airport: देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट के लिए 5428 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण, 25 हजार परिवार होंगे विस्थापित

Noida Airport: देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट के लिए 5428 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण, 25 हजार परिवार होंगे विस्थापित

नोएडा। Noida International Airport परियोजना को लेकर देश का सबसे बड़ा भूमि अधिग्रहण तेजी से अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत कुल 5428 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे करीब 18 गांवों के लगभग 25 हजार परिवारों का विस्थापन होगा। यह अधिग्रहण नए भूमि कानून के तहत देश के सबसे बड़े अधिग्रहणों में शामिल माना जा रहा है।

सरकार के अनुसार, केंद्र और प्रदेश की “डबल इंजन” नीति के चलते यह पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रही है। फिलहाल एयरपोर्ट का पहला चरण एक रनवे, टर्मिनल बिल्डिंग, एटीसी टावर और अन्य बुनियादी ढांचे के साथ शुरू किया जा रहा है। भविष्य में इसे चरणबद्ध तरीके से विस्तारित किया जाएगा।

परियोजना को चार चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में एक रनवे के साथ एयरपोर्ट की शुरुआत होगी, जिसकी सालाना यात्री क्षमता लगभग 1.2 करोड़ होगी। वर्ष 2031 तक यह क्षमता दो रनवे के साथ बढ़कर 3 करोड़, 2036 तक 5 करोड़ और 2040 तक 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचने का अनुमान है।

एयरपोर्ट के निर्माण पर बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। पहले चरण में करीब 36 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि कुल निवेश 2040 तक लगभग 36,267 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। शुरुआती चरण के लिए 3300 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर करीब 4406 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

एयरपोर्ट के दूसरे चरण में कुल पांच रनवे तैयार किए जाएंगे। पहले और दूसरे रनवे के लिए 1334 हेक्टेयर, तीसरे के लिए 1365 हेक्टेयर, चौथे के लिए 1318 हेक्टेयर और पांचवें के लिए 735 हेक्टेयर भूमि निर्धारित की गई है। इस प्रकार कुल 4752 हेक्टेयर जमीन रनवे निर्माण के लिए और 676 हेक्टेयर विस्थापन के लिए उपयोग में लाई जाएगी।

बताया जा रहा है कि Narendra Modi द्वारा वर्ष 2021 में इस परियोजना का शिलान्यास किया गया था। आगामी 28 मार्च को प्रस्तावित उद्घाटन कार्यक्रम में एयरपोर्ट के पांच रनवे के विस्तृत मॉडल को भी प्रस्तुत किया जाएगा।

यह परियोजना न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के एविएशन सेक्टर को नई ऊंचाई देने वाली मानी जा रही है। हालांकि, बड़े पैमाने पर हो रहे विस्थापन को लेकर स्थानीय लोगों की चिंताएं भी सामने आ रही हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि विकास और विस्थापन के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है।

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