New Noida DNGIR: 80 गांवों का बनेगा GIS मैप, डिजिटल डेटा के आधार पर तय होगी न्यू नोएडा की रूपरेखा

New Noida DNGIR: 80 गांवों का बनेगा GIS मैप, डिजिटल डेटा के आधार पर तय होगी न्यू नोएडा की रूपरेखा
दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्र (डीएनजीआईआर) यानी न्यू नोएडा को विकसित करने की प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रदेश के सबसे महत्वाकांक्षी शहरी विकास परियोजनाओं में शामिल न्यू नोएडा के लिए नोएडा प्राधिकरण ने जमीनी स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में 80 गांवों के लिए जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS) आधारित विस्तृत मैप तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इसके लिए विभिन्न सरकारी विभागों और संबंधित प्राधिकरणों से भू-स्थानिक डेटा मांगा गया है।
प्राधिकरण द्वारा मांगी गई जानकारी में नदियां, नहरें, तालाब, जल निकाय, आंतरिक सड़कें, मुख्य मार्ग, हाईवे और अन्य आधारभूत संरचनाओं से संबंधित विवरण शामिल हैं। यह डेटा बुलंदशहर और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के उन 80 गांवों से जुड़ा है जिन्हें मिलाकर भविष्य का न्यू नोएडा विकसित किया जाना है।
अधिकारियों के अनुसार इस भू-स्थानिक डेटा के जरिए क्षेत्र में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों, सिंचाई के स्रोतों, जल निकायों और परिवहन नेटवर्क की वर्तमान स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इसके बाद पूरे क्षेत्र का व्यापक GIS मैप तैयार किया जाएगा, जो शहर की भविष्य की योजना और विकास का आधार बनेगा। यह डिजिटल रिकॉर्ड आने वाले वर्षों में शहरी नियोजन, भूमि उपयोग और बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
न्यू नोएडा का मास्टर प्लान 209.11 वर्ग किलोमीटर यानी 20,911.29 हेक्टेयर क्षेत्र में तैयार किया गया है। इस विशाल परियोजना को चार चरणों में विकसित करने की योजना बनाई गई है। पहले चरण में वर्ष 2023 से 2027 के बीच 3,165 हेक्टेयर क्षेत्र का विकास किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि पहले चरण की समयसीमा को देखते हुए विकास कार्यों की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
दूसरे चरण में वर्ष 2027 से 2032 के बीच 3,798 हेक्टेयर क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। इसके बाद तीसरे चरण में वर्ष 2032 से 2037 तक 5,908 हेक्टेयर भूमि पर विभिन्न विकास परियोजनाएं संचालित की जाएंगी। चौथे और अंतिम चरण में वर्ष 2037 से 2041 तक 8,230 हेक्टेयर क्षेत्र का विकास किया जाएगा। इस प्रकार चरणबद्ध तरीके से पूरे न्यू नोएडा को आधुनिक और योजनाबद्ध शहर के रूप में विकसित किया जाएगा।
भूमि अधिग्रहण को लेकर भी नोएडा प्राधिकरण ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। प्राधिकरण ने यमुना विकास प्राधिकरण की तर्ज पर किसानों के लिए मुआवजा नीति तैयार की है। अधिकारियों के मुताबिक किसानों से आपसी सहमति के आधार पर जमीन ली जाएगी ताकि अधिग्रहण प्रक्रिया में विवाद की संभावना कम हो और विकास कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़ सकें।
नई नीति के तहत किसानों के लिए मुआवजा दर 4,300 रुपये प्रति वर्गमीटर तय की गई है। जो किसान विकसित भूखंड नहीं लेना चाहते, उन्हें पूरी राशि नकद मुआवजे के रूप में दी जाएगी। वहीं जो किसान 7 प्रतिशत विकसित प्लॉट लेने का विकल्प चुनेंगे, उन्हें 3,800 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजा प्रदान किया जाएगा। प्राधिकरण का मानना है कि इससे किसानों को बेहतर विकल्प मिलेंगे और परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध कराने में सहयोग मिलेगा।
अधिकारियों का कहना है कि GIS मैप तैयार होने के बाद यह तय करने में आसानी होगी कि आवासीय क्षेत्र, औद्योगिक सेक्टर, संस्थागत परिसर और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए कौन-से क्षेत्र सबसे उपयुक्त होंगे। इसके साथ ही जल निकायों के संरक्षण, हरित क्षेत्र विकसित करने और सड़क नेटवर्क को वैज्ञानिक तरीके से तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
न्यू नोएडा को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने की योजना है। GIS आधारित डिजिटल मैपिंग से न केवल विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ शहरी विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। आने वाले वर्षों में यह परियोजना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के सबसे बड़े शहरी विस्तारों में से एक साबित हो सकती है।





