
New Labour Codes India: चार नई श्रम संहिताएं पिछले 78 वर्षों का सबसे बड़ा श्रम सुधार, गिग और असंगठित श्रमिकों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा का लाभ
नई दिल्ली/जयपुर। देश के श्रम कानूनों के इतिहास में एक बड़ा बदलाव करते हुए 29 पुराने श्रम कानूनों को चार नई श्रम संहिताओं में समाहित किया जाना पिछले 78 वर्षों का सबसे बड़ा श्रम सुधार माना जा रहा है। इन नई श्रम संहिताओं में वर्क फ्रॉम होम, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स, साथ ही असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो बदलते कार्य परिवेश और आधुनिक रोजगार संरचना के अनुरूप हैं।
यह बात केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के श्रम, रोजगार और उद्योग सचिवों के दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन के उद्घाटन के बाद कही। उन्होंने कहा कि नई श्रम संहिताओं का उद्देश्य न केवल श्रमिकों को बेहतर सुरक्षा और अधिकार देना है, बल्कि नियोक्ताओं के लिए भी नियमों को सरल बनाकर अनुपालन को सुगम करना है। मंत्री ने केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, कर्मचारी राज्य बीमा निगम के विस्तार और प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया।
उद्घाटन सत्र में राजस्थान के सहकारिता मंत्री गौतम कुमार डाक ने कहा कि नई श्रम संहिताएं विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत कदम हैं। उन्होंने श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा के दायरे को व्यापक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया और ईएसआईसी कवरेज को अधिक से अधिक श्रमिकों तक पहुंचाने की बात कही।
केंद्रीय श्रम सचिव वंदना गुरनानी ने अपने संबोधन में कहा कि नई श्रम संहिताएं रोजगार के औपचारिकरण को बढ़ावा देंगी और अनुपालन की प्रक्रिया को सरल बनाएंगी। इससे न केवल उद्योगों को लाभ होगा, बल्कि रोजगार सृजन और समग्र आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि इन संहिताओं के तहत नियमों की अधिसूचना, आईटी प्रणालियों का विकास, विभिन्न बोर्डों और योजनाओं का गठन तथा अधिकारियों और हितधारकों की क्षमता निर्माण पर गंभीरता से काम किया जा रहा है।
सम्मेलन के दौरान श्रम संहिताओं के नियमों के क्रियान्वयन, डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग, श्रमिक कल्याण योजनाओं और राज्यों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, ईएसआईसी, ईपीएफओ और वी. वी. गिरी राष्ट्रीय श्रम संस्थान के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। सम्मेलन में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि नई श्रम संहिताएं श्रमिकों और उद्योग दोनों के हित में संतुलित और दूरगामी सुधार की दिशा में एक अहम कदम हैं।





