BSA Medical College Delhi: बाबा साहब अंबेडकर मेडिकल कॉलेज में 57 प्रतिशत फैकल्टी की भारी कमी

BSA Medical College Delhi: बाबा साहब अंबेडकर मेडिकल कॉलेज में 57 प्रतिशत फैकल्टी की भारी कमी

नई दिल्ली। डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर मेडिकल कॉलेज (बीएसए-एमसी) में फैकल्टी की गंभीर कमी सामने आई है। एक आरटीआई के जरिए खुलासा हुआ है कि कॉलेज में लगभग 57 प्रतिशत फैकल्टी पद खाली हैं, जो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मानकों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है। यह स्थिति न केवल मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि मरीजों की देखभाल और क्लीनिकल ट्रेनिंग को भी प्रभावित कर रही है।

दिल्ली सरकार के अधीन रोहिणी सेक्टर-6 स्थित इस मेडिकल कॉलेज में यदि एनएमसी का निरीक्षण होता है, तो एमबीबीएस सीटों में कटौती या तत्काल फैकल्टी भर्ती के निर्देश दिए जा सकते हैं। 2 नवंबर 2025 को दाखिल आरटीआई के जवाब में कॉलेज प्रशासन ने विभागवार प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की स्थिति साझा की है, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

आरटीआई के अनुसार एनाटॉमी विभाग में केवल एक प्रोफेसर कार्यरत है, जबकि फिजियोलॉजी में दो प्रोफेसर हैं। बायोकेमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी जैसे अहम विषयों में एक भी प्रोफेसर नहीं है। फॉरेंसिक मेडिसिन, कम्युनिटी मेडिसिन, रेडियो डायग्नोसिस और ईएनटी जैसे जरूरी विभागों में भी फैकल्टी की संख्या बेहद कम है। सबसे गंभीर स्थिति जनरल मेडिसिन विभाग की बताई जा रही है, जहां पिछले वर्ष पूरे विभाग में एक भी प्रोफेसर तैनात नहीं था।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एनएमसी के नियमों के तहत मेडिकल कॉलेजों में सीनियर फैकल्टी की एक निर्धारित संख्या होना अनिवार्य है, ताकि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक मार्गदर्शन और पर्याप्त क्लीनिकल एक्सपोजर मिल सके। फैकल्टी की इस भारी कमी का सीधा असर मेडिकल छात्रों की पढ़ाई, शोध कार्य और मरीजों के इलाज पर पड़ता है।

सूत्रों के मुताबिक यदि मौजूदा हालात में एनएमसी का निरीक्षण हुआ, तो कॉलेज की मान्यता, एमबीबीएस सीटों की संख्या और भविष्य की भर्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह सवाल भी उठ रहा है कि दिल्ली सरकार और स्वास्थ्य विभाग इतने बड़े मेडिकल संस्थान में लंबे समय से चली आ रही इस समस्या को लेकर अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठा पाए हैं।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार कब तक इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए स्थायी प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करती है या फिर बीएसए मेडिकल कॉलेज को एनएमसी की सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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