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New Delhi : दिल्ली में 13 नई ‘जीरो वेस्ट’ गौशालाएं बनेंगी, आधुनिक सुविधाओं से होगा विकास

New Delhi : दिल्ली में गौवंश संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि राजधानी में 13 नई गौशालाएं ‘जीरो वेस्ट मॉडल’ पर विकसित की जाएंगी। इन गौशालाओं का उद्देश्य गौवंश को बेहतर देखभाल, पर्याप्त स्थान और प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में कई गौशालाओं में सीमित जगह में अधिक संख्या में गौवंश रखा जा रहा है, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इस स्थिति को सुधारने के लिए नई गौशालाओं का निर्माण किया जाएगा। साथ ही जब तक ये गौशालाएं पूरी तरह तैयार नहीं हो जातीं और गौवंश का स्थानांतरण नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा गौशालाओं में पशु चिकित्सकों और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था जारी रहेगी।

यह घोषणा किशनगंज स्थित पिंजरापोल सोसायटी द्वारा संचालित गौशाला परिसर में नवनिर्मित राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गौशाला में गौमाता की सेवा करते हुए उन्हें हरा चारा भी खिलाया और गौ सेवा को सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक जिम्मेदारी बताया।

सरकार की योजना के तहत प्रत्येक जिले में कम से कम एक नई गौशाला स्थापित की जाएगी, जिसके लिए स्थानों की पहचान की जा चुकी है। इन गौशालाओं को आधुनिक मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जिसमें बायोगैस प्लांट, पशु चिकित्सालय, सोलर प्लांट और जीरो वेस्ट मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सरकार गोबर के वैज्ञानिक निपटान के लिए बायोगैस प्लांट स्थापित कर रही है और अगले दो वर्षों में छह नए प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा डेयरी कॉलोनियों के सुधार और पुनर्विकास के लिए 100 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। भविष्य में गौशालाओं को दिल्ली के रिज और वन क्षेत्रों से जोड़ने की योजना भी तैयार की जा रही है, ताकि गौवंश को अधिक प्राकृतिक वातावरण मिल सके।

सरकार ने गौशाला संचालकों और समाजसेवियों के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए इस क्षेत्र में लंबित अनुदानों को तेजी से जारी किया है। भूमि लीज के नवीनीकरण और बिजली-पानी से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर भी प्राथमिकता से काम किया गया है। साथ ही इस वर्ष लगभग 24 करोड़ रुपये का भुगतान समय से पहले जारी कर दिया गया है, ताकि गौसेवा से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।

सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से दिल्ली में गौ संरक्षण को एक नई दिशा मिलेगी और पर्यावरण के अनुकूल सतत विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

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