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Haryana Van Mahotsav 2026 पौधारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी*

Haryana Van Mahotsav 2026 पौधारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी*

रिपोर्ट :कोमल रमोला
चंडीगढ़ , 30 जुलाई।हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पौधारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। प्रदेश सरकार ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को जन-जन का अभियान बनाकर हरियाणा को और अधिक हरा-भरा बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।उन्होंने आगे कहा कि प्रकृति से जुड़ना ही भगवान शिव से जुड़ना है। सावन के पावन माह की शुरुआत पर हर व्यक्ति “एक लोटा जल भगवान शिव के नाम और एक पौधा आने वाली पीढ़ी के नाम” का संकल्प ले।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी वीरवार को करनाल के कुटेल स्थित पंडित दीन दयाल उपाध्याय आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित 77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्य प्राणी मंत्री श्री राव नरबीर सिंह ने की, जबकि हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष श्री हरविन्द्र कल्याण विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 800 स्कूली बच्चों के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण कर 77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया तथा सभी को ‘एक पेड़ मां के नाम’ की प्रतिज्ञा दिलाई। इसके उपरांत उन्होंने वन विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा ‘हरियाणा फॉरेस्ट न्यूज’ एवं ‘धार्मिक वृक्षारोपण’ पुस्तिकाओं का विमोचन किया। समारोह के दौरान मियावाकी के तहत 20 हजार पौधों का रोपण भी किया गया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान स्वच्छ हरियाणा, हरित हरियाणा विषय पर आयोजित क्विज व पेंटिंग प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन इसलिए भी विशेष है क्योंकि सावन महीने का शुभारंभ हुआ है। भगवान शिव का संपूर्ण स्वरूप प्रकृति से जुड़ा हुआ है और उनका प्रत्येक रूप हमें पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हम भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करते हैं, उसी प्रकार बेल सहित अन्य उपयोगी वृक्षों का रोपण और संरक्षण भी हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि हर घर, हर गांव, हर खेत और हर शहर को हरियाली से भरने का संकल्प लें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान मनुष्य के स्वास्थ्य की रक्षा करता है, जबकि वृक्ष पूरी पृथ्वी के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं। अस्पतालों में ऑक्सीजन जीवन बचाती है, लेकिन जंगल हमें चौबीसों घंटे प्राकृतिक ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और हरियाली अनेक बीमारियों से बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को सदैव पूजनीय माना गया है। हमारे पूर्वजों ने पीपल, वट, तुलसी और नीम जैसे वृक्षों को विशेष महत्व दिया। माता अमृता देवी बिश्नोई और उनके साथियों का बलिदान आज भी हमें वृक्षों की रक्षा का संदेश देता है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, जल संकट और प्रदूषण जैसी चुनौतियों का समाधान तभी संभव है, जब सरकार के साथ समाज भी पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेकर आगे आए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान आज जन आंदोलन का रूप ले चुका है। पंचायतों और सार्वजनिक भूमि पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है। दुर्लभ एवं संकटग्रस्त वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है तथा किसानों को खेतों की मेड़ों और उपलब्ध भूमि पर स्थानीय एवं उपयोगी प्रजातियों के पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि और वानिकी एक-दूसरे के सहयोगी हैं और वृक्ष किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी, जल और पर्यावरण की भी रक्षा करते हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 में प्रदेश में 1 करोड़ 40 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 44 हेक्टेयर क्षेत्र में मियावाकी पद्धति से सघन वन विकसित किए जाएंगे। पिछले वित्त वर्ष में प्रदेश में 1 करोड़ 52 लाख पौधे लगाए गए। प्रदेश में 58 हर्बल पार्क, 75 नमो पार्क, प्रत्येक जिला मुख्यालय पर ऑक्सी वन, गांवों में पंचवटी तथा कुरुक्षेत्र के 134 तीर्थों पर पंचवटी वाटिकाएं विकसित की जा रही हैं। प्रदेश के 610 वन मित्र हरियाली बढ़ाने और पौधों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वहीं प्राण वायु देवता योजना के तहत 5,360 पुराने एवं पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्षों के संरक्षण के लिए प्रति वृक्ष 3,000 रुपये वार्षिक प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

*विद्यार्थी कम-से-कम एक पौधे को गोद ले*

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से स्कूली विद्यार्थियों से आह्वान किया कि प्रत्येक विद्यार्थी कम-से-कम एक पौधे को गोद ले और उसकी नियमित देखभाल की जिम्मेदारी निभाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी पौधे का नाम रखें, उसके विकास का रिकॉर्ड तैयार करें और अपने जन्मदिन सहित अन्य विशेष अवसरों पर उसके संरक्षण का संकल्प दोहराएं। यदि आज का युवा एक-एक पौधे को जीवनभर संवारने का संकल्प ले ले, तो हरियाणा की हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का सपना स्वतः साकार हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पौधरोपण किसी एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी आजीवन जिम्मेदारी और संस्कार है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं। सच्चा विकास वही है, जिसमें सड़क भी हो और छायादार वृक्ष भी, उद्योग भी हों और स्वच्छ हवा भी। उन्होंने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनका संरक्षण करने का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली से समृद्ध हरियाणा छोड़ना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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