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Mizo Translation Workshop: सभी भाषाएं समान, एनबीटी ने मिजो अनुवाद कार्यशाला में दोहराया संदेश

Mizo Translation Workshop: सभी भाषाएं समान, एनबीटी ने मिजो अनुवाद कार्यशाला में दोहराया संदेश

नई दिल्ली और आइजोल में आयोजित दो दिवसीय मिजो अनुवाद कार्यशाला के माध्यम से राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि सभी भाषाएं समान हैं और किसी भी भाषा को छोटा या बड़ा नहीं माना जा सकता। इस कार्यशाला का आयोजन मिजोरम यूनिवर्सिटी में किया गया, जिसमें 20 अनुवादकों ने भाग लेते हुए अंग्रेजी से मिजो भाषा में अनूदित पुस्तकों की गहन समीक्षा की। कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल अनुवाद कार्य की गुणवत्ता को बेहतर बनाना था, बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं के विकास को भी प्रोत्साहित करना था।
इस कार्यशाला के दौरान अनुवाद में भाषाई शुद्धता, स्पष्टता और एकरूपता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने सहयोगात्मक समीक्षा के जरिए पांडुलिपियों को और अधिक सटीक और प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया। विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया कि किसी भी भाषा में अनुवाद करते समय केवल शब्दों का रूपांतरण ही नहीं, बल्कि उस भाषा के सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भों को भी समझना बेहद जरूरी होता है।
उद्घाटन सत्र में प्रोफेसर Vanalalchhavana ने मातृभाषा आधारित शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों को उनकी अपनी भाषा में शिक्षा देने से उनकी समझ और सीखने की क्षमता बेहतर होती है। वहीं एनबीटी के मुख्य संपादक Kumar Vikram ने अपने संबोधन में कहा कि सभी भाषाएं समान हैं और हर भाषा का अपना महत्व और सम्मान है। उन्होंने यह भी कहा कि अनुवाद के माध्यम से ज्ञान को व्यापक स्तर पर पहुंचाया जा सकता है और यह भाषा के विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
कार्यशाला में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बहुभाषी शिक्षा और अनुवाद तंत्र को मजबूत करने के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत जैसे बहुभाषी देश में अनुवाद की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के बीच सेतु का काम करता है। कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन के साथ एनबीटी ने यह दोहराया कि वह क्षेत्रीय भाषाओं के विकास और अनुवाद प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास करता रहेगा। इस तरह की कार्यशालाएं न केवल भाषाई समृद्धि को बढ़ावा देती हैं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विविधता को भी मजबूत बनाती हैं।

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