
Military Third Revolution India: मिलिट्री मामलों में तीसरी क्रांति की आवश्यकता पर सीडीएस का जोर
नई दिल्ली। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को सिकंदराबाद में रक्षा प्रबंधन कॉलेज (CDM) में ‘मित्र’ थीम पर आयोजित वार्षिक सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते युद्ध परिदृश्य में भारतीय सशस्त्र बलों को नेट-सेंट्रिक ऑपरेशन से आगे बढ़कर इंटेलिजेंट वारफेयर और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की ओर बढ़ना होगा। इसका उद्देश्य ‘ऑल रियल्म ऑल डोमेन ऑपरेशन’ की क्षमता विकसित करना है।
सीडीएस ने बताया कि आज का युद्ध केवल सीमा पर नहीं, बल्कि साइबर, अंतरिक्ष और सूचना क्षेत्रों में भी लड़ा जा रहा है। इसलिए सशस्त्र बलों को हर रियल्म और डोमेन में एक साथ जवाब देने और बढ़त बनाने की क्षमता आवश्यक है। उन्होंने ‘मिलिट्री मामलों में तीसरी क्रांति’ और कन्वर्जेंस वॉरफेयर की जरूरत पर जोर दिया और नॉन-न्यूक्लियर स्ट्रेटेजिक डिटरेंस विकसित करने की भी बात कही।
इस दो दिवसीय सेमिनार में इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, हैदराबाद को नॉलेज पार्टनर बनाया गया था। सेमिनार का उद्देश्य तकनीक-सक्षम, एकीकृत और रेसिलिएंट सशस्त्र बलों का निर्माण करना है। इसमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, विद्वान और उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए। 1970 में स्थापित CDM ट्राई-सर्विस संस्थान है, जो सैन्य नेतृत्व को आधुनिक प्रबंधन और रणनीतिक सोच से सशक्त बनाने के लिए समर्पित है।
सीडीएस ने रियल्म और डोमेन की परिभाषा भी दी। रियल्म में भौतिक क्षेत्र (जमीन, समुद्र, हवा), अंतरिक्ष, साइबर और कॉग्निटिव/सूचना क्षेत्र (मनोवैज्ञानिक, सूचना और मीडिया युद्ध) शामिल हैं। डोमेन में आर्मी, नेवी, एयर फोर्स, अंतरिक्ष, साइबर, इलेक्ट्रॉनिक और सूचना युद्ध शामिल हैं।
उन्होंने ARADO की खासियत बताते हुए कहा कि यह हर क्षेत्र, माध्यम और स्तर पर प्रभावी और बुद्धिमत्तापूर्ण सैन्य संचालन सुनिश्चित करता है। इसमें रियल टाइम डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नेटवर्क-सेंट्रिक सिस्टम का उपयोग होता है। काइनेटिक (हथियार आधारित) और नॉन-काइनेटिक (साइबर, सूचना, आर्थिक) कार्रवाइयों का एकीकरण भी इसके प्रमुख तत्व हैं।
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