MILAN 2026 Exercise: वैश्विक समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए दुनिया एकजुट हो, राजनाथ सिंह

MILAN 2026 Exercise: वैश्विक समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए दुनिया एकजुट हो, राजनाथ सिंह
विशाखापत्तनम में आयोजित बहुराष्ट्रीय अभ्यास ‘मिलन 2026’ के उद्घाटन समारोह में रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समुद्र में उभरती जटिल और परस्पर जुड़ी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूरी दुनिया को आपसी सम्मान, सहयोग और साझा प्रतिबद्धता के साथ एकजुट होकर कार्य करना होगा।
इस अवसर पर भारतीय नौसेना प्रमुख Admiral Dinesh K Tripathi, वाइस एडमिरल Sanjay Bhalla सहित 74 देशों के नौसेना प्रमुख और प्रतिनिधिमंडल प्रमुख मौजूद रहे। इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व ने इस अभ्यास को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण बना दिया है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप समुद्री मार्गों, जलडमरूमध्यों और समुद्रतल संसाधनों को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। साथ ही समुद्री आतंकवाद, समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ना, तस्करी, साइबर खतरे और आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान जैसी चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि हुई है, जिससे मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों की आवश्यकता पहले से अधिक हो गई है।
रक्षा मंत्री ने United Nations के समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक नौसैनिक सहयोग के माध्यम से इसे और सशक्त बनाया जा सकता है। भारत अंतरराष्ट्रीय नियमों, संप्रभुता के सम्मान और नौवहन की स्वतंत्रता पर आधारित न्यायसंगत समुद्री व्यवस्था के पक्ष में है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi की ‘सागर’ से ‘महासागर’ तक की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह क्षेत्रीय और वैश्विक साझेदारों के साथ भारत की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भारत एक जिम्मेदार और विश्वसनीय ‘विश्व-मित्र’ के रूप में रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा।
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने ‘मिलन 2026’ को एक ‘मैरीटाइम महाकुंभ’ बताते हुए कहा कि यह अभ्यास पेशेवर आदान-प्रदान, पारस्परिक समझ और संचालनात्मक तालमेल को मजबूत करेगा। अभ्यास दो चरणों—हार्बर फेज और सी फेज—में आयोजित किया जाएगा, जिसमें संगोष्ठियां, संयुक्त अभ्यास और समुद्री युद्धाभ्यास शामिल होंगे।





