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Labour Code: केंद्रीय श्रम मंत्री शोभा करंदलाजे ने चार श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन पर किया मंथन

Labour Code: केंद्रीय श्रम मंत्री शोभा करंदलाजे ने चार श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन पर किया मंथन

नई दिल्ली/विजयवाड़ा, 27 जनवरी: केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के श्रम, रोजगार एवं उद्योग सचिवों के दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन का भव्य उद्घाटन किया। इस सम्मेलन में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, पुडुचेरी और दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, साथ ही ईएसआईसी, ईपीएफओ, डीटीएनबीडब्ल्यूईडी, डीजीएफएएसएलआई, डीजीएमएस और वी.वी. गिरी राष्ट्रीय श्रम संस्थान के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि चार नई श्रम संहिताओं के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार संहिताओं में समाहित करना ऐतिहासिक सुधार है, जो पारदर्शिता बढ़ाएगा, अनुपालन को सरल बनाएगा और श्रमिक कल्याण को मजबूत करेगा।

मंत्री ने महिला श्रमिकों की भागीदारी, वर्क-फ्रॉम-होम, गिग व असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा जैसे प्रावधानों पर भी विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन नई संहिताओं के माध्यम से श्रमिकों की सुरक्षा, लाभ और अधिकारों का दायरा व्यापक होगा, जिससे रोजगार क्षेत्र में स्थायित्व और समान अवसर सुनिश्चित होंगे।

आंध्र प्रदेश के श्रम मंत्री वसमसेट्टी सुभाष ने सम्मेलन को सहकारी संघवाद का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि अंतिम छोर तक जागरूकता और राज्य-केन्द्र समन्वय ही सफलता की कुंजी हैं। सम्मेलन में नियमों के अंतिम रूप, आईटी प्रणालियों की तैयारी, ईएसआईसी-ईपीएफओ सुधार, केंद्र-राज्य समन्वय और प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने साझा किया कि इन सुधारों से न केवल श्रमिकों के हित सुरक्षित होंगे, बल्कि उद्योग और व्यवसाय क्षेत्र में भी पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच साझा रणनीतियों को मजबूती देना, नई संहिताओं के क्रियान्वयन में समन्वय बढ़ाना और श्रमिक कल्याण योजनाओं को प्रभावी बनाना था। विशेषज्ञों ने इस अवसर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म और आईटी आधारित निगरानी तंत्र के महत्व पर भी जोर दिया, जिससे सभी हितधारकों के लिए प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बन सके।

इस क्षेत्रीय सम्मेलन से यह स्पष्ट हुआ कि श्रम सुधार केवल कानूनों में बदलाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका उद्देश्य पूरे देश में रोजगार सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक हितों को सुनिश्चित करना है। राज्य और केंद्र की सरकारें मिलकर इस परिवर्तन को जमीन तक प्रभावी बनाने की दिशा में प्रयासरत हैं।

 

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