Iran Protests: ईरान में 15 दिनों से जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन, 544 की मौत, हजारों गिरफ्तार, हालात पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव

Iran Protests: ईरान में 15 दिनों से जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन, 544 की मौत, हजारों गिरफ्तार, हालात पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव
ईरान में पिछले 15 दिनों से जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन लगातार और उग्र होते जा रहे हैं। ईरान की ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी (HRANA) के अनुसार अब तक इस हिंसा में 544 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 8 बच्चे भी शामिल हैं। इसके अलावा 10,681 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि राजधानी तेहरान समेत कई बड़े शहरों में आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है और देशभर में डर व अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स भी हालात की भयावह तस्वीर पेश कर रही हैं। CNN के मुताबिक, तेहरान में एक अस्पताल के बाहर लाशों का ढेर लगा हुआ है, जहां कई लोग अपने परिजनों की पहचान करने और उनकी लाशें तलाशने के लिए भटकते नजर आए। ये दृश्य ईरान में चल रहे संकट की गंभीरता को उजागर करते हैं और यह दिखाते हैं कि हिंसा किस हद तक पहुंच चुकी है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मौजूदा हालात को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को ‘आतंकी युद्ध’ करार दिया है। अराघची के अनुसार, हिंसा में शामिल आतंकी तत्वों ने योजनाबद्ध तरीके से सरकारी इमारतों, पुलिस थानों और कारोबार से जुड़ी जगहों को निशाना बनाया है। उन्होंने दावा किया कि ईरानी अधिकारियों के पास ऐसे ऑडियो रिकॉर्ड मौजूद हैं, जिनमें आतंकियों को आम नागरिकों और सुरक्षा बलों पर गोली चलाने के आदेश दिए गए हैं।
इससे पहले भी अराघची ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिसकर्मियों की हत्या करने और उन्हें जिंदा जलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने इन घटनाओं को इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद की साजिश बताया था और कथित हमलों से जुड़े वीडियो भी साझा किए थे। सरकार का कहना है कि यह आंदोलन केवल आंतरिक असंतोष नहीं, बल्कि बाहरी ताकतों द्वारा प्रायोजित हिंसा है।
ईरान में जारी अशांति का असर देश की सीमाओं से बाहर भी देखने को मिला है। अमेरिका के लॉस एंजिलिस में ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान एक ट्रक भीड़ में घुस गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। घटना में कितने लोग घायल हुए, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इससे गुस्साए प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा हालात को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान सरकार पर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रम्प ने कहा है कि ईरान प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए ‘रेड लाइन’ पार कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका इस स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है और ‘कड़े विकल्पों’ पर विचार कर रहा है। पत्रकारों से बातचीत में ट्रम्प ने कहा कि मौतों और गिरफ्तारियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पहले कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है, हालांकि ईरान की ओर से बातचीत का प्रस्ताव भी सामने आया है और इस पर चर्चा चल रही है।
ईरान में जारी यह हिंसक आंदोलन अब केवल देश के अंदरूनी हालात तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि हालात किस दिशा में जाते हैं और क्या ईरानी जनता को इस संघर्ष के बीच इंसाफ, सुरक्षा और स्थिरता मिल पाती है या नहीं।





