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Indian Air Force exercise: एयरोस्पेस डोमेन में मजबूत हो रही भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ साझेदारी

Indian Air Force exercise: एयरोस्पेस डोमेन में मजबूत हो रही भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ साझेदारी

नई दिल्ली,  Indian Air Force (आईएएफ) और Royal Thai Air Force (आरएटीएफ) के बीच चार दिवसीय ‘इन-सीटू’ संयुक्त सैन्य अभ्यास हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस अभ्यास ने दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और रणनीतिक समन्वय को नई मजबूती प्रदान की।

उन्नत लड़ाकू विमानों की भागीदारी

यह द्विपक्षीय अभ्यास एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग एक्सरसाइज के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें आईएएफ के Su-30 MKI मल्टीरोल फाइटर जेट और आरएटीएफ के SAAB Gripen लड़ाकू विमान शामिल रहे।

आईएएफ के IL-78 मिड-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर विमानों ने समुद्री क्षेत्र में लंबी दूरी के ऑपरेशन को संभव बनाया। अभ्यास के दौरान आईएएफ के एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) विमान और आरएटीएफ के ग्राउंड कंट्रोल इंटरसेप्शन तत्वों ने निगरानी और कमांड क्षमताओं को और प्रभावी बनाया।

अंडमान-निकोबार से संचालन

अभ्यास में भाग लेने वाली आईएएफ की टुकड़ियों ने Andaman and Nicobar Islands के एयरबेस से संचालन किया, जबकि थाई ग्रिपेन विमानों ने थाईलैंड स्थित एयरबेस से उड़ान भरी।

इस अभ्यास का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में मित्र देशों के साथ आईएएफ की पहुंच और इंटरऑपरेबिलिटी को प्रदर्शित करना था। संयुक्त प्रशिक्षण के दौरान दोनों वायु सेनाओं ने परिचालन अनुभव साझा किया और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं (Best Practices) का आदान-प्रदान किया।

‘एक्ट ईस्ट’ नीति को मजबूती

यह संयुक्त अभ्यास भारत और थाईलैंड के बीच बढ़ती सामरिक साझेदारी का प्रतीक है और एयरोस्पेस क्षेत्र में भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के विस्तार को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अभ्यास क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने और आपसी विश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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