
India Japan military exerciseभारत-जापान संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘धर्म गार्जियन-2026’ का सफल समापन, आतंकवाद-रोधी अभियानों में बढ़ा सामरिक सहयोग
देहरादून/नई दिल्ली, 9 मार्च : भारत और जापान के बीच सैन्य सहयोग को नई मजबूती देते हुए संयुक्त सैन्य अभ्यास Exercise Dharma Guardian 2026 का सातवां संस्करण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। यह अभ्यास 24 फरवरी से 8 मार्च तक उत्तराखंड के चौबटिया स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में आयोजित किया गया, जिसमें Indian Army और Japan Ground Self-Defense Force के सैनिकों ने संयुक्त रूप से भाग लिया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच सामरिक समझ, संचालन क्षमता और आपसी समन्वय को और मजबूत करना था।
करीब दो सप्ताह तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान दोनों देशों के सैनिकों ने आतंकवाद-रोधी और उग्रवाद-रोधी अभियानों से संबंधित विभिन्न सैन्य अभ्यासों में हिस्सा लिया। अभ्यास में शहरी क्षेत्रों में युद्धक रणनीति, जटिल और पहाड़ी भूभाग में सैन्य कार्रवाई, संयुक्त ऑपरेशन की योजना बनाना तथा आधुनिक तकनीकों का उपयोग जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष जोर दिया गया। सैन्य अधिकारियों के अनुसार इस तरह के अभ्यास से सैनिकों को वास्तविक परिस्थितियों में संयुक्त अभियान चलाने का व्यावहारिक अनुभव मिलता है, जिससे भविष्य में किसी भी साझा सुरक्षा चुनौती का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।
इस संयुक्त अभ्यास के दौरान सैनिकों ने विभिन्न सामरिक ड्रिल का अभ्यास किया, जिनमें दुश्मन की घेराबंदी, तलाशी अभियान, शहरी इलाकों में आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई और संवेदनशील परिस्थितियों में बंधकों को सुरक्षित निकालने की रणनीतियां शामिल थीं। इसके साथ ही आधुनिक युद्धक तकनीकों, ड्रोन निगरानी प्रणाली और हेलीकॉप्टर आधारित अभियानों के समन्वित उपयोग पर भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभ्यास से दोनों देशों की सेनाओं के बीच सामरिक ज्ञान और अनुभवों का आदान-प्रदान होता है, जो भविष्य में संयुक्त अभियानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होता है।
अभ्यास की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी एक्सरसाइज आसाही शक्ति रही, जिसे अंतिम वैलिडेशन अभ्यास के रूप में आयोजित किया गया। लगभग 48 घंटे तक चले इस फील्ड अभ्यास में एक काल्पनिक आतंकवादी परिदृश्य तैयार किया गया, जिसमें सैनिकों को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में मिशन पूरा करना था। इस दौरान कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन, हेलिबोर्न ऑपरेशन, बंधक बचाव अभियान और ड्रोन आधारित निगरानी जैसे कई जटिल सैन्य अभियानों का अभ्यास किया गया। अधिकारियों के अनुसार इस अभ्यास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि दोनों देशों के सैनिक संयुक्त रूप से किसी भी आतंकवादी खतरे का प्रभावी तरीके से मुकाबला कर सकें।
समापन समारोह में जापान की ओर से Tsunehiro Yanagida और भारत की ओर से Sudhanshu Sharma सहित दोनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने अभ्यास के दौरान सैनिकों द्वारा प्रदर्शित पेशेवर कौशल, अनुशासन और आपसी सहयोग की सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि इस अभ्यास ने न केवल दोनों सेनाओं के बीच सामरिक तालमेल को मजबूत किया है, बल्कि भारत और जापान के बीच रक्षा साझेदारी को भी नई दिशा दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत और जापान के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, संयुक्त अभ्यास और रणनीतिक साझेदारी को लगातार मजबूत किया है। धर्म गार्जियन जैसे अभ्यास इस साझेदारी को और गहरा बनाते हैं और दोनों देशों को बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार करते हैं।
इस सफल समापन के साथ एक बार फिर यह स्पष्ट हुआ है कि भारत और जापान क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और सामरिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सैन्य अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में भी इस तरह के संयुक्त अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच भरोसा, समन्वय और पेशेवर क्षमता को और अधिक मजबूत करेंगे।





