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Delhi vision Problems: दिल्ली में हर 10 में से 3 लोगों को चश्मे की जरूरत, डिजिटल लाइफ बढ़ा रही आंखों की समस्या

Delhi vision Problems: दिल्ली में हर 10 में से 3 लोगों को चश्मे की जरूरत, डिजिटल लाइफ बढ़ा रही आंखों की समस्या

नई दिल्ली, 9 मार्च : राजधानी दिल्ली में आंखों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। AIIMS Delhi के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र की हालिया स्टडी के अनुसार दिल्ली की लगभग 30% आबादी रिफ्रैक्टिव एरर (दृष्टि दोष) से प्रभावित है, जिसके कारण उन्हें साफ देखने के लिए चश्मे की जरूरत पड़ती है।

कम्युनिटी ऑप्थेल्मोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. प्रवीण वशिष्ठ ने बताया कि बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल गैजेट्स का उपयोग आंखों की समस्याओं को बढ़ा रहा है। खासकर बच्चों में स्क्रीन टाइम बढ़ने से मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) तेजी से बढ़ रहा है। स्टडी में यह भी सामने आया कि 50 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 70% लोगों को साफ देखने के लिए चश्मे की जरूरत है, जबकि करीब 20% बच्चों में भी दृष्टि दोष पाया गया।

दिल्ली में आई-केयर सेवाओं का ढांचा अभी पर्याप्त नहीं है। राजधानी में करीब 249 आई-केयर संस्थान, 1,085 ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट और लगभग 489 ऑप्टोमेट्रिस्ट कार्यरत हैं, लेकिन जनसंख्या के अनुपात में प्रशिक्षित ऑप्टोमेट्रिस्ट की संख्या अभी भी कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित आंखों की जांच, बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण और प्राथमिक स्तर पर नेत्र सेवाओं को मजबूत करना इस समस्या को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट, ऑप्टोमेट्रिस्ट और ऑप्टिशियन में अंतर

  • ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट : आंखों के विशेषज्ञ डॉक्टर, गंभीर बीमारियों का इलाज करते हैं और सर्जरी करते हैं (जैसे मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, रेटिना की बीमारियां)।
  • ऑप्टोमेट्रिस्ट : आंखों की जांच और दृष्टि विशेषज्ञ, चश्मे का नंबर बताते हैं, कॉन्टैक्ट लेंस फिट करते हैं और गंभीर मामलों में डॉक्टर को रेफर करते हैं।
  • ऑप्टिशियन : चश्मा बनाने और फिट करने वाले तकनीशियन, डॉक्टर या ऑप्टोमेट्रिस्ट द्वारा दिए गए नंबर के अनुसार चश्मा तैयार करते हैं।

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संवाददाता

Tirthankar Sarkar

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