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Himachal Pradesh Budget: आरआईडीएफ के तहत 758.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान, मुख्यमंत्री ने विधायकों से की प्राथमिकताओं पर चर्चा

Himachal Pradesh Budget: आरआईडीएफ के तहत 758.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान, मुख्यमंत्री ने विधायकों से की प्राथमिकताओं पर चर्चा

शिमला, 6 फरवरी: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विधायकों की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया। पहले दिन के दूसरे सत्र में सोलन, चम्बा, बिलासपुर, लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिले के विधायकों ने अपनी क्षेत्रीय आवश्यकताएं प्रस्तुत कीं। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रीजनल इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट फंड (आरआईडीएफ) के तहत 758.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है।

मुख्यमंत्री ने विभागों को निर्देश दिए कि यदि किसी डीपीआर को अन्य मद से स्वीकृति मिल चुकी है, तो उसे नाबार्ड से वापस करने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए, ताकि रिकॉर्ड का मेल-मिलाप समय पर किया जा सके। उन्होंने वर्ष 2023 और 2025 में हुई भारी बरसात और बादल फटने की घटनाओं में जनहानि और संपत्ति नुकसान पर भी चर्चा करते हुए कहा कि सरकार ने अपने संसाधनों से लोगों को राहत और पुनर्वास के लिए समुचित आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई।

ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यटन, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण और डेटा स्टोरेज को प्राथमिक क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया। उन्होंने बताया कि रोबोटिक सर्जरी, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, एडवांस टेस्टिंग लैब, बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट और पैट स्कैन जैसी आधुनिक मशीनें स्थापित की जा रही हैं। रोबोटिक सर्जरी का प्रथम चरण चमियाणा अस्पताल और टांडा मेडिकल कॉलेज में शुरू हो चुका है। आगामी तीन महीने में सभी मेडिकल कॉलेजों में थ्री टैस्ला एमआरआई मशीनें लगाई जाएंगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार को मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता बताया और आने वाले दो वर्षों में 3,000 करोड़ रुपये हाई-एंड टेक्नोलॉजी पर खर्च करने की जानकारी दी।

शिक्षा क्षेत्र में भी बड़े सुधार किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने 140 CBSE स्कूल और चार राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल खोलने की जानकारी दी। पेयजल योजनाओं में आधुनिक ओज़ोनेशन तकनीक लागू कर शुद्ध जल उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने पिछले तीन वर्षों में 5.70 लाख म्यूटेशन मामलों का निपटारा किया और 31 मार्च तक 80 प्रतिशत दुरुस्ती मामलों का समाधान करने का लक्ष्य रखा।

विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की आवश्यकताओं को प्रमुखता से उठाया। सोलन के अर्की विधायक संजय अवस्थी ने सड़कों के सुधार और केंद्र द्वारा हिमाचल को आरडीजी नहीं मिलने की बात उठाई। नालागढ़ के विधायक हरदीप सिंह बावा ने पुलों और सड़कों के निर्माण, ट्यूबवेल और राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल की मांग रखी। दून के विधायक राम कुमार ने कार्यालय भवनों और सड़कों की मरम्मत के लिए धन की आवश्यकता जताई। कसौली के विधायक विनोद सुल्तानपुरी ने स्वास्थ्य सेवाओं और सड़कों के नेटवर्क में सुधार की मांग की।

चम्बा जिले के हंसराज, डॉ. जनक राज और नीरज नैय्यर ने अपने क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी भवनों, पर्यटन और सड़क परियोजनाओं में तेजी लाने की आवश्यकता बताई। डलहौजी के विधायक डी.एस. ठाकुर ने आपदा प्रभावित सड़कों की मरम्मत और परियोजनाओं की FCA क्लियरेंस जल्द करवाने की मांग रखी। बिलासपुर जिले के जीतराम कटवाल और त्रिलोक जम्वाल ने सिंचाई, पीने के पानी, सीवरेज और पर्यटन गतिविधियों में सुधार की आवश्यकता जताई। श्री नैना देवी के रणधीर शर्मा ने पीएम ग्राम सड़क योजना की औपचारिकताएं पूरी करने और आईसीयू भवन निर्माण में तेजी लाने की मांग की।

लाहौल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा ने हेली-टैक्सी सेवा, कुंजुम सुरंग के निर्माण, जनजातीय क्षेत्रों में होटलों की रजिस्ट्रेशन शर्तों में ढील और पांच स्पेशलिस्ट डॉक्टर उपलब्ध कराने की मांग रखी।

मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया और प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार ने सभी का बैठक में स्वागत किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया सहित प्रशासनिक सचिव, विभागाध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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