
Hearing loss youth: समय से 10 साल पहले बहरापन बढ़ रहा, मोबाइल और तेज आवाज जिम्मेदार: AIIMS
नई दिल्ली। विश्व श्रवण दिवस की पूर्व संध्या पर एम्स दिल्ली के ईएनटी विभाग ने चेतावनी दी है कि आज के युवा समय से करीब 10 साल पहले बहरापन का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक मोबाइल फोन का अत्यधिक प्रयोग, म्यूजिक कंसर्ट, डीजे और सिनेमा की कानफोड़ू आवाजें श्रवण शक्ति को कमजोर कर रही हैं।
एम्स के ईएनटी विभाग के प्रमुख डॉ. राकेश कुमार, डॉ. कपिल सिक्का, डॉ. पूनम सागर और स्पीच थेरेपिस्ट शिवानी अग्रवाल ने बताया कि दिनभर मोबाइल पर लगातार संगीत सुनना, देर रात तक कॉल करना और लंबे समय तक बातचीत करना सुनने की क्षमता पर गंभीर असर डाल रहा है। इससे तनाव बढ़ता है, सोने-जागने का पैटर्न प्रभावित होता है और श्रवण शक्ति समय से पहले घटती है।
डॉ. पूनम सागर ने कहा कि पहले लोग 50-55 वर्ष की उम्र में सुनने की क्षमता खोते थे, लेकिन अब 40-45 साल की आयु में भी युवा बहरापन महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ सुनने की क्षमता पर असर नहीं डालता, बल्कि प्रभावित व्यक्ति सामाजिक रूप से उपेक्षित भी महसूस करता है।
विशेषज्ञों ने 60/60 नियम अपनाने की सलाह दी है। इसके तहत गाने सुनते या कॉल करते समय वॉल्यूम 60% से अधिक न रखें और एक बार में 60 मिनट से ज्यादा संगीत या बातचीत न करें। संतुलन बनाए रखने के लिए रोज का समय निर्धारित करें, पढ़ाई या काम के दौरान फोन साइलेंट रखें, सोने से एक घंटे पहले फोन और म्यूजिक बंद कर दें और हफ्ते में एक दिन डिजिटल ब्रेक लें।
इस चेतावनी का उद्देश्य युवाओं को अपने सुनने की क्षमता के प्रति जागरूक करना और समय रहते उचित सावधानी अपनाने के लिए प्रेरित करना है।




