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Greater Noida Green Area: गोलचक्कर और हरित क्षेत्र की देखरेख में लापरवाही, संस्थाओं की रिपोर्ट तलब

Greater Noida Green Area: गोलचक्कर और हरित क्षेत्र की देखरेख में लापरवाही, संस्थाओं की रिपोर्ट तलब

ग्रेटर नोएडा में गोलचक्करों और हरित क्षेत्रों के रखरखाव को लेकर प्राधिकरण ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। गोद लेने के बावजूद सही देखभाल न करने वाली संस्थाओं के खिलाफ अब कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। प्राधिकरण ने ऐसी सभी संस्थाओं की रिपोर्ट तलब की है और जरूरत पड़ने पर उनके साथ किए गए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को निरस्त करने की चेतावनी दी है।

शहर को हरा-भरा और सुंदर बनाने के उद्देश्य से प्राधिकरण ने गोलचक्करों, हरित क्षेत्रों और सेंट्रल वर्ज को निजी संस्थाओं को गोद देने की योजना शुरू की थी। इसके तहत संस्थाओं को इन स्थानों की सफाई, पौधारोपण और नियमित देखरेख की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन कई संस्थाएं इस जिम्मेदारी को ठीक से निभाने में विफल रही हैं।

हाल ही में इस मुद्दे पर खबर सामने आने के बाद प्राधिकरण के उच्च अधिकारियों ने संज्ञान लिया। सीईओ के निर्देश पर उद्यान विभाग की टीम ने विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान 130 मीटर चौड़ी सड़क पर मिग्सन अल्टीमो सोसाइटी के पास स्थित गोलचक्कर की स्थिति बेहद खराब पाई गई, जहां लंबे समय से सफाई और मरम्मत का काम नहीं हुआ था।

प्राधिकरण ने इस गोलचक्कर को गोद लेने वाली नॉर्थ विंड एस्टेट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वहां लगाए गए प्रचार बोर्ड को हटा दिया। जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने सौंदर्यीकरण और रखरखाव के अपने दायित्वों का पालन नहीं किया। इसके बाद वहां सफाई और मरम्मत का कार्य शुरू कराया गया।

इस कार्रवाई के बाद अन्य संस्थाओं में भी हड़कंप मच गया है। कई जगहों पर गुरुवार को अचानक सफाई अभियान शुरू होते देखा गया, जिसमें मजदूर सेंट्रल वर्ज और गोलचक्करों की सफाई करते नजर आए।

प्राधिकरण की एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस ने निर्देश दिए हैं कि उन सभी संस्थाओं की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए, जिन्होंने गोद लेने के बाद भी रखरखाव में लापरवाही बरती है। बताया जा रहा है कि ग्रेटर नोएडा में कुल 34 गोलचक्कर हैं, जिनमें से अधिकांश को विभिन्न संस्थाओं को गोद दिया गया है।

शहर के लोगों ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि कई संस्थाएं केवल प्रचार के लिए बोर्ड लगाकर जिम्मेदारी से बच रही हैं, जबकि पहले ये स्थान अधिक साफ और हरियाली से भरपूर थे। लोगों ने मांग की है कि ऐसी संस्थाओं के साथ किए गए समझौते तुरंत रद्द किए जाएं और जिम्मेदारी निभाने वाली एजेंसियों को ही काम सौंपा जाए।

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