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Greater Noida: ग्रेटर नोएडा में मियावाकी पद्धति से विकसित हुए 31 एकड़ के घने वन, लगाए गए चार लाख से अधिक पौधे

Greater Noida: ग्रेटर नोएडा में मियावाकी पद्धति से विकसित हुए 31 एकड़ के घने वन, लगाए गए चार लाख से अधिक पौधे

नोएडा। बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने मियावाकी पद्धति से घने वन विकसित करने का कार्य तेज कर दिया है। अब तक प्राधिकरण क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में कुल 31.13 एकड़ भूमि पर घने वन विकसित किए जा चुके हैं, जहां चार लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं। आने वाले मानसून सत्र में इस हरित अभियान को और विस्तार देने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है, जिसके लिए नए स्थानों की पहचान की जा रही है।

प्राधिकरण के उद्यान विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मियावाकी पद्धति के तहत सीमित क्षेत्र में अधिक संख्या में पौधे लगाकर प्राकृतिक रूप से घने वन तैयार किए जा रहे हैं। यह कार्य चार प्रमुख स्थानों पर सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों और एनजीओ का सहयोग भी लिया जा रहा है। इससे पहले सूरजपुर स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में भी मियावाकी वन विकसित किया गया था, जिसे काफी सकारात्मक परिणाम मिले हैं।

दरअसल, ग्रेटर नोएडा में लगातार बढ़ते प्रदूषण स्तर और घटती हरियाली को देखते हुए प्राधिकरण ने हरित क्षेत्र बढ़ाने की एक व्यापक योजना तैयार की है। इस योजना के अंतर्गत पारंपरिक पौधरोपण के साथ-साथ मियावाकी पद्धति को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि कम समय में अधिक हरियाली विकसित की जा सके। इस पद्धति से तैयार किए गए वन इतने घने होते हैं कि सूर्य की किरणें भी जमीन तक नहीं पहुंच पातीं, जिससे तापमान नियंत्रित रहता है और धूल व शोर में भी कमी आती है।

उद्यान विभाग के सहायक निदेशक बुद्ध विलास ने बताया कि ग्रीन बेल्ट और खाली पड़ी जमीनों पर मियावाकी वन विकसित किए जा रहे हैं। खानपुर गांव, सेक्टर पी-3, सेक्टर-16 और जुनपत गांव के पास बड़े क्षेत्रफल में पौधरोपण का कार्य किया गया है। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण को और मजबूती देने के उद्देश्य से लगभग 15 नए स्थानों पर मियावाकी वन विकसित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। आगामी मानसून सत्र में इन स्थानों पर घने वन विकसित किए जाएंगे, जिसके लिए कई एनजीओ ने आगे बढ़कर सहयोग की इच्छा जताई है।

मियावाकी पद्धति जापान के प्रसिद्ध वनस्पतिशास्त्री डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित की गई है। इस तकनीक में एक वर्ग मीटर क्षेत्र में कम से कम तीन पौधे लगाए जाते हैं, जिससे कुछ ही वर्षों में एक प्राकृतिक और घना वन तैयार हो जाता है। यह पद्धति न केवल जलवायु परिवर्तन से निपटने में सहायक है, बल्कि वायु प्रदूषण, धूल और ध्वनि प्रदूषण को कम करने में भी प्रभावी साबित हो रही है।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि कुमार एनजी ने कहा कि प्रदूषण से निपटने और सड़कों को धूल मुक्त बनाने के उद्देश्य से मियावाकी पद्धति से घने वन विकसित किए जा रहे हैं। अब तक 31 एकड़ से अधिक क्षेत्र में पौधरोपण किया जा चुका है और शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए उद्यान विभाग को लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। आने वाले समय में यह पहल ग्रेटर नोएडा को और अधिक स्वच्छ व हरित शहर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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