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Gold Price Crash: भीषण बिकवाली से हिला कीमती धातुओं का बाजार, रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोना-चांदी औंधे मुंह गिरे, जानिए अचानक गिरावट की बड़ी वजह

Gold Price Crash: भीषण बिकवाली से हिला कीमती धातुओं का बाजार, रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोना-चांदी औंधे मुंह गिरे, जानिए अचानक गिरावट की बड़ी वजह

गुरुवार को ऐतिहासिक तेजी दर्ज करने के बाद शुक्रवार को सोने और चांदी के बाजार में जबरदस्त भूचाल आ गया। असाधारण रूप से अस्थिर सत्र में निवेशकों की भारी मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों के दबाव में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना और चांदी दोनों ही बड़े नुकसान के साथ बंद हुए, जिससे निवेशकों में चिंता और बाजार में हड़कंप का माहौल बन गया।

सप्ताह की शुरुआत में आई जोरदार तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली स्वाभाविक मानी जा रही थी, लेकिन गिरावट का पैमाना उम्मीद से कहीं ज्यादा बड़ा रहा। एमसीएक्स पर 5 फरवरी 2026 को समाप्त होने वाले सोने के वायदा भाव में करीब 11,000 रुपये यानी लगभग 6.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 1,59,984 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं 5 मार्च 2026 की डिलीवरी वाली चांदी में और भी ज्यादा तेज गिरावट देखने को मिली। चांदी के दाम करीब 68,000 रुपये या 16.6 प्रतिशत टूटकर 3,34,503 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए और 3.5 लाख रुपये के अहम स्तर से नीचे फिसल गए।

यह गिरावट इसलिए भी चौंकाने वाली रही क्योंकि इससे एक दिन पहले ही दोनों धातुएं अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंची थीं। चांदी 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक गई थी, जबकि सोना 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक शिखर पर पहुंचा था। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी यही रुझान देखने को मिला। कॉमेक्स गोल्ड एक्सचेंज पर सोना करीब 2.2 प्रतिशत गिरकर 5,236.74 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि हाजिर बाजार में सोना और चांदी दोनों में तेज दबाव देखा गया।

विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद आक्रामक मुनाफावसूली रही। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर में मजबूती ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा दिया। डॉलर इंडेक्स हाल के निचले स्तर 96 से उछलकर ऊपर आया, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपया भी रिकॉर्ड कमजोरी पर पहुंच गया। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के मानव मोदी के मुताबिक, रिकॉर्ड स्तर के बाद डॉलर में तेजी आने से निवेशकों ने तेजी से मुनाफा काटा, जिससे सोना और चांदी दोनों में तीखी गिरावट देखने को मिली।

विश्व स्वर्ण परिषद ने भी भारत में भविष्य की मांग को लेकर चिंता जताई है। परिषद का कहना है कि रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के कारण भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश में आभूषणों की मांग कमजोर पड़ सकती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2025 की चौथी तिमाही में केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीद में कुछ सुस्ती आई, हालांकि निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी ने इस कमी की काफी हद तक भरपाई कर दी।

कीमतों में गिरावट का असर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ईटीएफ पर भी साफ दिखाई दिया। शुक्रवार को सोने और चांदी से जुड़े ईटीएफ में 14 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। चांदी आधारित ईटीएफ को सबसे ज्यादा झटका लगा। ज़ेरोधा सिल्वर ईटीएफ, एसबीआई सिल्वर ईटीएफ और निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ में करीब 14 प्रतिशत तक की गिरावट आई, जबकि कोटक सिल्वर ईटीएफ करीब 12 प्रतिशत टूट गया। सोने के ईटीएफ भी दबाव में रहे, जहां निप्पॉन इंडिया गोल्ड ईटीएफ में करीब 10 प्रतिशत और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

वैश्विक स्तर पर भी बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा गया। हाजिर चांदी एक दिन पहले के रिकॉर्ड 121.64 डॉलर प्रति औंस से गिरकर करीब 109.55 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जबकि हाजिर सोना 5,594.82 डॉलर के उच्च स्तर से फिसलकर 5,183 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। यह तेज उलटफेर उस समय देखने को मिला जब अमेरिका में फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीति को लेकर अटकलें तेज हो गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल के स्थान पर नए उम्मीदवार के संकेत और अपेक्षाकृत सख्त रुख वाले नेतृत्व की संभावना ने डॉलर को मजबूती दी और सोने-चांदी पर दबाव बढ़ाया।

हालांकि इस भारी गिरावट के बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि दीर्घकालिक रुझान अब भी मजबूत बना हुआ है। सोना 1980 के दशक के बाद अपने सर्वश्रेष्ठ मासिक प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है, जबकि चांदी जनवरी महीने में 50 प्रतिशत से अधिक की संभावित बढ़त के साथ अब तक का सबसे मजबूत मासिक प्रदर्शन दर्ज कर सकती है। विश्लेषकों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की मांग आने वाले समय में कीमतों को सहारा दे सकती है, लेकिन उतार-चढ़ाव बना रहेगा।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट कुछ निवेशकों के लिए खरीदारी का मौका हो सकती है, जबकि कुछ इसे अत्यधिक तेजी के बाद स्वाभाविक सुधार मान रहे हैं। आगे की दिशा अमेरिकी महंगाई आंकड़ों, मौद्रिक नीति के संकेतों और वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। फिलहाल इतना तय है कि सोना और चांदी दोनों ही आने वाले समय में निवेशकों की परीक्षा लेने वाले हैं।

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