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FirstOne Rehab Foundation: फ़र्स्टवन रीहैब फ़ाउंडेशन में स्पीच थैरेपिस्ट डे और बाल दिवस का भव्य आयोजन

FirstOne Rehab Foundation: फ़र्स्टवन रीहैब फ़ाउंडेशन में स्पीच थैरेपिस्ट डे और बाल दिवस का भव्य आयोजन

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रिपोर्ट: अजीत कुमार

नोएडा में फ़र्स्टवन रीहैब फ़ाउंडेशन द्वारा 14 नवंबर 2025 को स्पीच थैरेपिस्ट डे और बाल दिवस का संयुक्त आयोजन बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत बाल दिवस समारोह से हुई, जहाँ बच्चों, थेरेपिस्टों और विशेष शिक्षकों ने मिलकर नृत्य किया, विभिन्न खेल गतिविधियों में भाग लिया और पूरे मन से आनंद लिया। बच्चों की मुस्कान और उत्साह ने पूरे वातावरण को ऊर्जा और खुशियों से भर दिया।

बाल दिवस समारोह के बाद स्पीच थैरेपिस्ट डे का कार्यक्रम प्रारंभ हुआ, जिसमें दिल्ली–एनसीआर के कई प्रतिष्ठित स्पीच थैरेपिस्ट और विशेषज्ञ शामिल हुए। ध्वनि हियरिंग एंड स्पीच क्लिनिक, विनोभापुरी से वरषा श्रीवास्तव, केयरवेल हियरिंग एंड स्पीच, शाहदरा से प्रेरणा खंडेलवाल, APSA हियरिंग एंड मल्टीमोड स्पीच थैरेपी सेंटर, सेक्टर 71 नोएडा से ऑडियोलॉजिस्ट संजय कुमार और विशेष शिक्षक तथा सामाजिक कार्यकर्ता अशोक कुमार ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। इसके अतिरिक्त डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव, डॉ. महिपाल सिंह और डॉ. भावना आनंद की मौजूदगी ने आयोजन को और विशेष बना दिया।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने अभिभावकों द्वारा पूछे जाने वाले कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की, जिनमें स्पीच थैरेपी की आवश्यकता, वर्चुअल ऑटिज़्म और ऑटिज़्म का अंतर, स्पीच थैरेपी शुरू करने का सही समय, छोटे बच्चों में बढ़ते ADD और ADHD के कारण, भाषा-विकास को घर पर प्रोत्साहित करने के तरीके और वाक् एवं भाषा विकास के प्रारंभिक चरण शामिल थे। फ़ाउंडेशन की एडमिन हेड और स्पीच थैरेपिस्ट कृष्णा यादव ने विशेष रूप से यह कहा कि अत्यधिक मोबाइल फ़ोन उपयोग बच्चों की भाषा, व्यवहार और सामाजिक विकास पर गहरा प्रभाव डाल रहा है, इसलिए अभिभावकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

पूरे कार्यक्रम का संचालन सौम्या सोनी, सलोनी राठौर और फ़र्स्टवन रीहैब फ़ाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुष्मिता भाटी द्वारा बेहद सुचारू और प्रभावशाली ढंग से किया गया। आयोजन के सफल संचालन में सुश्री इलिका रावत, सुश्री सुरभि जैन, अभिनव प्रताप सिंह, नैतिक ओझा और ग्रंथ गुप्ता की अहम भूमिका रही। यह आयोजन ज्ञान, जागरूकता, संवाद और उत्सव का ऐसा प्रेरक संगम साबित हुआ, जिसने बच्चों, अभिभावकों और विशेषज्ञों के लिए इस दिन को एक यादगार अनुभव में बदल दिया।

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