Disability Rights: दिल्ली विधानसभा समिति ने दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की सुविधाओं पर की चर्चा, UDID कार्ड प्रक्रिया आसान बनाने पर जोर
रिपोर्ट: रवि डालमिया
नई दिल्ली में दिल्ली विधानसभा की समिति की बैठक में दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण, सामाजिक समावेशन और आत्मनिर्भरता से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष करनैल सिंह ने की। इसमें कृष्णा नगर के विधायक डॉ. अनिल गोयल, विधायक हरीश खुराना, विधायक प्रेम चौहान, समाज कल्याण विभाग के निदेशक नीरज और विभाग के अन्य अधिकारी शामिल हुए। बैठक में सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक आसानी से पहुंचाने, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने और शिक्षा तथा रोजगार के समान अवसर सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में दिव्यांगजनों के लिए विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र यानी यूडीआईडी (UDID) कार्ड और दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया को सरल बनाने की आवश्यकता पर विचार किया गया। समिति ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए दिव्यांग व्यक्तियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं, लंबी प्रतीक्षा और बार-बार अस्पतालों के चक्कर लगाने जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। इसके लिए प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक और समयबद्ध बनाने की जरूरत बताई गई।
समिति की बैठक में सुझाव दिया गया कि दिव्यांगजनों को उनके घरों के आसपास लगभग पांच से दस किलोमीटर के दायरे में स्वास्थ्य जांच और दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इससे दूर स्थित अस्पतालों तक जाने में होने वाली परेशानी और खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, यूडीआईडी कार्ड जारी करने के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची को कम करने और आवेदन से लेकर प्रमाणपत्र मिलने तक की प्रक्रिया को सुचारु बनाने पर भी चर्चा हुई। स्थानीय स्तर पर जांच सुविधाएं उपलब्ध होने से विशेष रूप से उन लोगों को राहत मिल सकती है, जिन्हें आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
दिव्यांगजनों को केवल सरकारी सहायता उपलब्ध कराने तक सीमित न रखते हुए उन्हें शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। बैठक में कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने, उनकी शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने और रोजगार प्राप्त करने में मदद देने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। समिति का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को अपनी क्षमताओं का उपयोग करने, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाना है। रोजगार और कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन को सामाजिक समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।
बैठक में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण और सामाजिक समावेशन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। समिति ने उनके लिए कौशल विकास, रोजगार और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच आसान बनाने की जरूरत पर बल दिया। चर्चा का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को भी शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सामाजिक भागीदारी के समान अवसर मिल सकें तथा उन्हें भेदभाव का सामना किए बिना सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध हो।
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर विचार करते हुए जरूरतमंद लोगों के लिए जेंडर री-असाइनमेंट सर्जरी जैसी चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच आसान बनाने के विषय पर भी चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने, जागरूकता फैलाने और सामाजिक स्वीकार्यता को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता सामने रखी गई। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि संबंधित व्यक्तियों को अपनी समस्याओं के समाधान और जरूरी सहायता प्राप्त करने के लिए स्पष्ट तथा सुलभ व्यवस्था मिलनी चाहिए।
जरूरतमंद दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए हेल्पलाइन व्यवस्था को मजबूत करने का सुझाव भी दिया गया। प्रत्येक जिले में सहायता संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विचार किया गया, ताकि लोगों को जानकारी प्राप्त करने, योजनाओं का लाभ लेने और अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए दूर नहीं जाना पड़े। ऐसी व्यवस्था से संबंधित विभागों और लाभार्थियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
बैठक में समिति अध्यक्ष करनैल सिंह, विधायक डॉ. अनिल गोयल, विधायक हरीश खुराना, विधायक प्रेम चौहान, समाज कल्याण विभाग के निदेशक नीरज तथा विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। चर्चा में दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार करने और शिक्षा तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया। समिति का उद्देश्य इन वर्गों को सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाना है।

