CJP Leaders Custody: सौरव दास और आशुतोष रांका को अदालत से झटका, दो दिन और तिहाड़ जेल में रहेंगे
सीजेपी से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत के मामले में अदालत से फिलहाल राहत नहीं मिली है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों को दो दिन और तिहाड़ जेल में रहना होगा। प्रकरण से जुड़े कानूनी तर्क, हिरासत की अवधि और आगे की सुनवाई की स्थिति न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने और वहां लागू प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के संबंध में लागू व्यवस्थाओं के बीच कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं ने वहां पहुंचकर नारेबाजी की थी। यह आरोप लगाया गया है कि सौरव दास और आशुतोष रांका अन्य कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस की बैरिकेडिंग पार कर जंतर-मंतर क्षेत्र में पहुंचे। पुलिस ने इसे सार्वजनिक व्यवस्था और शांति भंग होने की आशंका से जुड़ा मामला बताया। पुलिस का यह भी यह आरोप लगाया गया है कि दोनों नेताओं ने पहले शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार से संबंधित बॉन्ड भरा था, लेकिन बाद में कथित तौर पर उसका उल्लंघन किया। इन आरोपों के आधार पर दोनों के खिलाफ निवारक कार्रवाई की गई।
सौरव दास और आशुतोष रांका को इससे पहले भी हिरासत में लिया गया था। पुलिस की जानकारी के अनुसार, 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से संबंधित गतिविधियों के दौरान दोनों को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रोका गया था। इसके पश्चात शांति भंग होने की आशंका के आधार पर निवारक कार्रवाई की गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों नेताओं ने शांति बनाए रखने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में जंतर-मंतर पर फिर से प्रदर्शन करने की अपील की गई। 13 अक्टूबर को दोनों नेताओं को दोबारा हिरासत में लिया गया और अगले दिन उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस प्रकरण में सीजेपी के एक अन्य नेता अजिंक्य शिंदे को व्यक्तिगत बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया था।
सीजेपी की ओर से दोनों नेताओं की गिरफ्तारी और हिरासत के संबंध में विरोध जताया गया है। पार्टी नेताओं का यह आरोप लगाया गया है कि उनके सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई प्रदर्शन करने और सरकार के विरोध में आवाज उठाने के कारण जारी है। पार्टी का कहना है कि वह चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े मुद्दों और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के संबंध में विरोध प्रदर्शन कर रही है। सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश, शांति बनाए रखने के लिए दिए गए आश्वासन के कथित उल्लंघन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी आशंकाओं के आधार पर की गई है। इस प्रकरण में पार्टी और पुलिस के दावों के बीच मतभेद बना हुआ है।
दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के बाद अब उनकी रिहाई के संबंध में अगली कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। अदालत ने वर्तमान में दो दिन की अतिरिक्त हिरासत का आदेश दिया है, जिसके चलते सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल में रहना होगा। पुलिस ने जहां सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था का हवाला दिया है, वहीं पार्टी ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। मामले में आगे क्या निर्णय होता है, यह अदालत की अगली कार्यवाही और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।


