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Child Development India: पहले 6 साल बच्चों के विकास की मजबूत नींव, विशेषज्ञों ने दिए जरूरी सुझाव

Child Development India: पहले 6 साल बच्चों के विकास की मजबूत नींव, विशेषज्ञों ने दिए जरूरी सुझाव

नई दिल्ली में आयोजित पोषण पखवाड़ा के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों के जीवन के शुरुआती छह वर्ष उनके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में मस्तिष्क का तेजी से विकास होता है, इसलिए सही पोषण, सुरक्षित वातावरण और सीखने के बेहतर अवसर देना बेहद जरूरी है।

Dr. Ram Manohar Lohia Hospital के प्रो. Dinesh Kumar Yadav ने कहा कि जन्म से 3 वर्ष तक बच्चों के लिए स्तनपान, समय पर टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद आवश्यक हैं। वहीं 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल-आधारित शिक्षा सबसे प्रभावी मानी जाती है, जो उनके मानसिक और सामाजिक विकास को मजबूत बनाती है।

All India Institute of Medical Sciences Delhi की प्रो. Shefali Gulati ने बताया कि जन्म से छह वर्ष तक पौष्टिक आहार, पर्याप्त नींद और खेल-कूद आधारित गतिविधियां बच्चों की सीखने की क्षमता को काफी बढ़ाती हैं और उनके समग्र विकास में अहम भूमिका निभाती हैं।

वहीं Lady Hardinge Medical College के बाल मनोचिकित्सा विभाग के प्रो. Sumit Rana के अनुसार, पहले छह वर्ष बच्चों के मस्तिष्क, भावनाओं और व्यक्तित्व की नींव तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों के पहले शिक्षक होते हैं और उनकी परवरिश का तरीका ही बच्चे के भविष्य को तय करता है।

विशेषज्ञों ने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों के साथ पहले भावनात्मक जुड़ाव बनाएं, फिर उन्हें सही-गलत का मार्गदर्शन दें। बच्चों की भावनाओं को समझें, उन्हें छोटे-छोटे विकल्प दें और अच्छे व्यवहार की सराहना करें। अत्यधिक सख्ती से बच्चों में डर और जिद बढ़ सकती है, इसलिए संतुलित और समझदारी भरी परवरिश जरूरी है।

इसके साथ ही विशेषज्ञों ने बढ़ते स्क्रीन टाइम पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि ज्यादा मोबाइल और टीवी देखने से बच्चों की नींद, ध्यान और व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ता है। अभिभावकों को बच्चों को आउटडोर खेल, संतुलित दिनचर्या और पारिवारिक संवाद की ओर प्रेरित करना चाहिए।

गौरतलब है कि Poshan Pakhwada 9 से 23 अप्रैल तक मनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य बच्चों और माताओं के पोषण व स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों के पहले छह वर्षों में उनकी समग्र देखभाल पर विशेष ध्यान दें, ताकि एक स्वस्थ, आत्मविश्वासी और जागरूक पीढ़ी का निर्माण हो सके।

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