Cancer Screening Camp: तीस हजारी कोर्ट में 45 से अधिक महिलाओं की कैंसर जांच, मैमोग्राफी और HPV-DNA टेस्ट किए गए

Cancer Screening Camp: तीस हजारी कोर्ट में 45 से अधिक महिलाओं की कैंसर जांच, मैमोग्राफी और HPV-DNA टेस्ट किए गए
नई दिल्ली के Tis Hazari Courts परिसर में बुधवार को कैंसर जागरूकता, रोकथाम और स्क्रीनिंग को लेकर एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया। इस कैंप का आयोजन Delhi State Cancer Institute द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों में ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समय रहते जांच के लिए लोगों को प्रेरित करना था।
इस कैंप में कोर्ट परिसर में कार्यरत कर्मचारियों के साथ-साथ आम लोगों ने भी भाग लिया। शिविर के दौरान महिलाओं को कैंसर से बचाव, शुरुआती लक्षणों की पहचान और नियमित जांच के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम में कई न्यायिक अधिकारी भी मौजूद रहे, जिनमें अंजू बजाज चांदना (जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मुख्यालय और अध्यक्ष सेंट्रल डीएलएसए), अदिति चौधरी (जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पश्चिम और अध्यक्ष वेस्ट डीएलएसए), अभितेश कुमार (सचिव सेंट्रल डीएलएसए), संकल्प कपूर (वेस्ट डीएलएसए) और रुचिका सिंगला (जिला न्यायाधीश) शामिल रहे।
शिविर के दौरान महिलाओं के लिए मुफ्त कैंसर जांच, विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श, जागरूकता सत्र, मैमोग्राफी जांच और एचपीवी-डीएनए टेस्ट जैसी कई स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। कैंप के समापन तक कुल 15 महिलाओं की मैमोग्राफी जांच और 30 महिलाओं के एचपीवी-डीएनए टेस्ट किए गए।
इसके अलावा महिलाओं को ब्रेस्ट सेल्फ-एग्जामिनेशन यानी स्वयं स्तन जांच के बारे में भी विस्तार से बताया गया, ताकि वे शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय रहते डॉक्टर से संपर्क कर सकें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित जांच से ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इस कार्यक्रम से एक दिन पहले एक ऑनलाइन जागरूकता सत्र भी आयोजित किया गया था, जिसमें ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग, एचपीवी वैक्सीनेशन और समय पर जांच की आवश्यकता पर चर्चा की गई। डॉक्टरों ने बताया कि यदि इन बीमारियों की शुरुआती अवस्था में पहचान हो जाए तो इलाज अधिक प्रभावी और सफल हो सकता है।
कार्यक्रम के दौरान क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा शुक्ला ने कहा कि नियमित स्क्रीनिंग और समय पर जांच से ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है। वहीं जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजू बजाज चांदना ने कहा कि कई लोग कैंसर जांच कराने से डरते हैं और अक्सर यह सोचकर जांच नहीं कराते कि कहीं रिपोर्ट पॉजिटिव न आ जाए, जबकि समय पर जांच कई बार जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इस तरह के कैंसर जागरूकता और स्क्रीनिंग शिविरों का उद्देश्य समाज में कैंसर की रोकथाम को बढ़ावा देना और लोगों को समय पर जांच के लिए प्रेरित करना है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा मिल सके।
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