HRTC Electric Bus: अगले पांच वर्षों में एचआरटीसी को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य, हिमाचल में 25 नई इलेक्ट्रिक बस सेवाएं शुरू
शिमला, 17 अगस्त। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के साथ हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को वर्चुअल माध्यम से मंडी जिले के लिए 25 नई टाइप-1 इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का शुभारंभ किया। इन बस सेवाओं की शुरुआत मंडी के पड्डल मैदान से की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में एचआरटीसी को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े का विस्तार करने के साथ-साथ आधुनिक चार्जिंग infrastructure विकसित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को ऊर्जा-कुशल, विश्वसनीय और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने एचआरटीसी के इलेक्ट्रिक बस बेड़े के विस्तार के लिए 297 नई टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसें खरीदी हैं। इन बसों का संचालन वर्तमान में शिमला, नाहन, नालागढ़, ऊना, हरोली, बिलासपुर, देहरा, हमीरपुर, पालमपुर, धर्मशाला और नगरोटा सहित विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है।
इसके अलावा कुल्लू, मंडी और सुंदरनगर में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए आवश्यक चार्जिंग infrastructure भी तैयार किया जा चुका है। मंडी में 25 नई इलेक्ट्रिक बस सेवाओं की शुरुआत इसी विस्तार का हिस्सा है। सरकार का कहना है कि चार्जिंग सुविधाओं के विस्तार के साथ आने वाले समय में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन और अधिक क्षेत्रों में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसों की निर्धारित ड्राइविंग रेंज 80 प्रतिशत स्टेट ऑफ चार्ज पर करीब 180 किलोमीटर है। परिचालन के दौरान इन बसों का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा है। उन्होंने बताया कि शिमला-चंडीगढ़ मार्ग पर इलेक्ट्रिक बस एक बार चार्ज करने के बाद करीब 270 किलोमीटर की दूरी सफलतापूर्वक तय कर रही है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश का पहाड़ी भू-भाग सार्वजनिक परिवहन के लिए चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में लंबी दूरी के अंतर-शहरी मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसों का सफल संचालन इनके उपयोग की संभावनाओं को मजबूत करता है। सरकार का प्रयास है कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से यात्रियों को बेहतर और सुविधाजनक परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रिक बसों के आर्थिक लाभ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में ऊर्जा लागत पर लगभग 12 से 13 रुपये प्रति किलोमीटर की बचत हो रही है। इससे एचआरटीसी के ईंधन और परिचालन खर्च में कमी आने के साथ निगम की समग्र परिचालन दक्षता में भी सुधार हो रहा है।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ते इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन कम करने और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिलेगी। सरकार के अनुसार चार्जिंग infrastructure का लगातार विस्तार और इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाना हिमाचल को स्वच्छ और हरित परिवहन व्यवस्था की ओर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार एचआरटीसी को बसें खरीदने के लिए सहयोग दे रही है और हर वर्ष करीब 840 करोड़ रुपये अनुदान के रूप में दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि एचआरटीसी अपने संसाधनों से भी लगभग इतनी ही राशि अर्जित कर रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले पांच वर्षों में निगम को अपने पैरों पर खड़ा कर आत्मनिर्भर बनाया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आने वाले समय में 1000 इलेक्ट्रिक बसें और 200 हाइड्रोजन बसें खरीदने की दिशा में आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने पहले बजट में ‘ग्रीन हिमाचल’ की परिकल्पना रखी थी और इलेक्ट्रिक बसों का संचालन उसी दृष्टिकोण को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
नई इलेक्ट्रिक बस सेवाओं से मंडी जिले में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। साथ ही डीजल आधारित परिवहन पर निर्भरता कम होने से पर्यावरणीय लाभ भी मिलने की संभावना है। सरकार की योजना आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक और अन्य स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन साधनों का विस्तार करने की है।
इस अवसर पर शिमला में अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार चंद शर्मा और एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक शिवम प्रताप सिंह मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहे। मंडी में वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान एचआरटीसी के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, एपीएमसी अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष शशि शर्मा, जिला कांग्रेस कमेटी मंडी अध्यक्ष चंपा ठाकुर सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


