Himachal Education Policy: हिमाचल में पहली कक्षा से शुरू होगी नैतिक शिक्षा, 600 जेबीटी शिक्षकों की भर्ती में तेजी लाने के निर्देश

Himachal Education Policy: हिमाचल में पहली कक्षा से शुरू होगी नैतिक शिक्षा, 600 जेबीटी शिक्षकों की भर्ती में तेजी लाने के निर्देश

हिमाचल प्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने नैतिक शिक्षा पर विशेष जोर देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 21 अक्टूबर 2026 को शिमला में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कक्षा पहली से नैतिक शिक्षा शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों में प्रारंभिक अवस्था से ही नैतिक मूल्यों, अनुशासन, करुणा, बड़ों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना आवश्यक है। शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना या शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार, संवेदनशील और अनुशासित नागरिक बनाना भी होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के चरित्र निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभिक कक्षाओं से ही शुरू की जानी चाहिए, ताकि उनमें अच्छे संस्कार और सकारात्मक व्यवहार विकसित हो सकें। उन्होंने नैतिक मूल्यों को शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी, दूसरों के प्रति सम्मान और करुणा जैसे गुणों को बढ़ावा देना जरूरी है। राज्य सरकार का प्रयास है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को ऐसी शिक्षा मिले, जो उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाने के साथ समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारियों का एहसास भी कराए।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई का पाठ्यक्रम लागू करने की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत संचालित होने वाले स्कूलों में योग्य शिक्षकों की उपलब्धता, पर्याप्त प्रशासनिक कर्मचारियों की तैनाती और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में बदलाव के साथ स्कूलों में आवश्यक संसाधन और कर्मचारियों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके और संस्थानों का संचालन सुचारू रूप से हो।

मुख्यमंत्री ने सीबीएसई स्कूलों के लिए जूनियर बेसिक टीचर यानी जेबीटी के 600 पदों पर भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि भर्ती से संबंधित आवश्यक प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए, ताकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने 100 नए स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन स्कूलों में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए शिक्षकों की आवश्यकता का समय रहते आकलन करना और उसके अनुसार तैनाती करना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने सीबीएसई स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था के साथ प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने मिनिस्ट्रीयल स्टाफ और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्धारित मानदंडों के अनुसार कर्मचारियों की जरूरत का आकलन करने और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों का प्रभावी संचालन केवल शिक्षकों की उपलब्धता पर निर्भर नहीं करता, बल्कि प्रशासनिक कार्यों और दैनिक व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए अन्य कर्मचारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए सभी स्कूलों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों की तैनाती की योजना तैयार की जानी चाहिए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने नई योजना आधारित भर्ती प्रक्रिया के तहत 3,900 शिक्षकों और 900 गैर-शिक्षकों के पदों को भरने की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करने पर जोर दिया। इन पदों को भरने से सरकारी शिक्षा व्यवस्था में मानव संसाधन की उपलब्धता बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है। सरकार का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की जरूरतों को योजनाबद्ध तरीके से पूरा करना है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी बन सके।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने और सरकारी स्कूलों को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रभावी निगरानी, जवाबदेही और समयबद्ध क्रियान्वयन पर बल देते हुए कहा कि विभागीय स्तर पर लिए गए निर्णयों को निर्धारित समय में लागू किया जाना चाहिए। सरकार की प्राथमिकता है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहतर हो, विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाएं मिलें और शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। नैतिक शिक्षा की शुरुआत, सीबीएसई पाठ्यक्रम के विस्तार और शिक्षकों तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों के पदों को भरने से संबंधित कदम इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं।

इस बैठक में सचिव शिक्षा डॉ. यूनुस, निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली सहित शिक्षा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने, सरकारी स्कूलों में आवश्यक कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं नैतिक विकास को प्राथमिकता देने से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।

 

Hot this week

Topics

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img