Noida Air Pollution: केंद्र सरकार के सामने पेश हुआ नोएडा का मॉडल, PM-10 में 21% सुधार, देशभर में मिली 9वीं रैंक
Noida Air Pollution: केंद्र सरकार के सामने पेश हुआ नोएडा का मॉडल, PM-10 में 21% सुधार, देशभर में मिली 9वीं रैंक
नोएडा। वायु प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में नोएडा ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। केंद्र सरकार की कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में आयोजित कमेटी ऑफ एयर पॉल्यूशन की बैठक में नोएडा प्राधिकरण ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए अपनाए गए तकनीक आधारित मॉडल, भविष्य की रणनीति और प्रबंधन प्रणाली का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक एस.पी. सिंह ने बताया कि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 में नोएडा ने देश के 131 नॉन-अटेनमेंट शहरों में 9वां स्थान हासिल किया है। इसके साथ ही 3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों की श्रेणी में भी नोएडा की रैंकिंग लगातार बेहतर हुई है। वर्ष 2018 में शहर 324वें स्थान पर था, जबकि अब शीर्ष शहरों में शामिल हो चुका है। उत्तर प्रदेश में सुपर स्वच्छ लीग में स्थान पाने वाला नोएडा एकमात्र शहर भी बन गया है।
प्राधिकरण के अनुसार वर्ष 2020-21 में शहर का पीएम-10 स्तर 197 था, जो वर्ष 2024-25 में घटकर 155 रह गया है। यानी चार वर्षों में लगभग 21.31 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया है।
प्रस्तुति में आईआईटी कानपुर के अध्ययन का हवाला देते हुए बताया गया कि नोएडा में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण सड़क की धूल और वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए ग्रेप और सीएक्यूएम के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विशेष निरीक्षण टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।
निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, नियमित वाटर स्प्रिंकलिंग, एंटी-स्मॉग गन का संचालन, खुले में कूड़ा जलाने पर रोक, डीजल जनरेटर की निगरानी और निर्माण एवं विध्वंस कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण जैसे उपायों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
प्राधिकरण ने शहर के 10 प्रमुख एयर पॉल्यूशन हॉटस्पॉट भी चिन्हित किए हैं, जिनमें सेक्टर-116/117, सेक्टर-150 से 158, यमुना पुश्ता रोड, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, दादरी रोड, सेक्टर-62 से 104 मार्ग, सेक्टर-50/51, एमिटी यूनिवर्सिटी क्षेत्र तथा सेक्टर-140 से 143 शामिल हैं। इन क्षेत्रों में विशेष सफाई, मैकेनिकल स्वीपिंग, ट्रैफिक प्रबंधन और निर्माण सामग्री को ढकने जैसे उपाय लगातार किए जा रहे हैं।
बैठक में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) और इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) की कार्यप्रणाली भी प्रस्तुत की गई। इनके माध्यम से कचरा संग्रहण, सफाई व्यवस्था, ट्रैफिक संचालन, मशीनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और वाहनों की आवाजाही पर लगातार नजर रखी जा रही है, जिससे ट्रैफिक जाम कम होने के साथ प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिल रही है।



