Industrial Area: छपरौला-दादरी औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए जिलाधिकारी ने दिए समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश
छपरौला-दादरी औद्योगिक क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान को लेकर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी मेधा रूपम की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उद्योगों के संचालन में आ रही प्रमुख दिक्कतों को प्रशासन के सामने रखा, जिस पर जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग-91 पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से कराए जा रहे ड्रेनेज निर्माण कार्य में हो रही देरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। उद्योग प्रतिनिधियों ने बताया कि कार्य में विलंब के कारण जल निकासी प्रभावित हो रही है, जिससे औद्योगिक गतिविधियों और यातायात दोनों पर असर पड़ रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को समन्वय स्थापित कर जल्द से जल्द कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए।
इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने पुराने विद्युत उपकेंद्र में जलभराव की समस्या भी प्रशासन के सामने रखी। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना था कि बरसात के दौरान जलभराव के कारण बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना रहता है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। जिलाधिकारी ने बिजली विभाग के अधिकारियों को इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने और आवश्यक सुधार कार्य शीघ्र कराने के निर्देश दिए।
बैठक में औद्योगिक क्षेत्र में अग्निशमन वाहन की उपलब्धता का मुद्दा भी उठाया गया। उद्योगपतियों ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए क्षेत्र में पर्याप्त अग्निशमन संसाधनों की आवश्यकता है। इसके अलावा नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सेक्शन-4 से संबंधित विभिन्न प्रशासनिक और बुनियादी समस्याओं पर भी चर्चा की गई।
जिलाधिकारी मेधा रूपम ने सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आपसी समन्वय के साथ उद्योगों से जुड़ी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करें। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास को गति देने और निवेशकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन पूरी गंभीरता के साथ कार्य कर रहा है। साथ ही प्रत्येक विभाग को अपने स्तर पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने और प्रगति की नियमित समीक्षा करने के भी निर्देश दिए गए।
प्रशासन का मानना है कि उद्योगों से जुड़ी आधारभूत समस्याओं का शीघ्र समाधान होने से स्थानीय औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, निवेश का माहौल बेहतर होगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।


