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NSCN-K Surrender: अरुणाचल में एनएससीएन-के के दो उग्रवादियों ने किया आत्मसमर्पण, हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटे

NSCN-K Surrender: अरुणाचल में एनएससीएन-के के दो उग्रवादियों ने किया आत्मसमर्पण, हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटे

नई दिल्ली, 30 जून : पूर्वोत्तर भारत में शांति और स्थिरता की दिशा में सुरक्षा बलों को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। अरुणाचल प्रदेश के तिरप जिले के खेती क्षेत्र में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन एनएससीएन-के (निक्की सुमी गुट) के दो सदस्यों ने स्वेच्छा से आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। दोनों उग्रवादियों ने 28 जून को असम राइफल्स और तिरप पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करते हुए अपने हथियार भी सुरक्षा बलों के हवाले कर दिए।

आत्मसमर्पण के दौरान दोनों उग्रवादियों ने दो पिस्तौल और जिंदा कारतूस सुरक्षा बलों को सौंपे। इसके बाद उन्हें निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करने और सरकार के पुनर्वास कार्यक्रम के तहत आगे की कार्रवाई के लिए हिरासत में लिया गया। अधिकारियों के अनुसार पुनर्वास योजनाओं के माध्यम से ऐसे युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाता है ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह सफलता असम राइफल्स द्वारा लंबे समय से चलाए जा रहे जनसंपर्क, विश्वास निर्माण और शांति बहाली अभियानों का सकारात्मक परिणाम है। सुरक्षा बल लगातार स्थानीय लोगों के साथ संवाद स्थापित कर उन्हें हिंसा का रास्ता छोड़ने और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसी रणनीति के चलते उग्रवादी गतिविधियों में कमी लाने और लोगों का विश्वास जीतने में लगातार सफलता मिल रही है।

सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस आत्मसमर्पण से क्षेत्र में सुरक्षा बलों और सरकार के प्रति स्थानीय लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ है। पूर्वोत्तर राज्यों में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए सुरक्षा अभियान के साथ-साथ विकास और पुनर्वास योजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे युवाओं को हिंसा से दूर रखकर बेहतर भविष्य की ओर प्रेरित किया जा सके।

असम राइफल्स और तिरप पुलिस ने अन्य भटके हुए युवाओं से भी अपील की है कि वे हथियार छोड़कर शांति, विकास और राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जुड़ें। अधिकारियों का मानना है कि आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों का पुनर्वास न केवल क्षेत्र में शांति स्थापित करने में मदद करेगा, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

 

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