Noida: फ्लैट का कब्जा न देने पर बिल्डर को झटका, उपभोक्ता आयोग ने ब्याज समेत रकम लौटाने का दिया आदेश
Noida: फ्लैट का कब्जा न देने पर बिल्डर को झटका, उपभोक्ता आयोग ने ब्याज समेत रकम लौटाने का दिया आदेश
नोएडा। फ्लैट खरीदारों के अधिकारों को लेकर जिला उपभोक्ता आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई बिल्डर निर्धारित समय में भवन या फ्लैट का कब्जा देने में विफल रहता है, तो उसे खरीदार से ली गई धनराशि ब्याज सहित वापस करनी होगी। इसी तरह के एक मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने अंसल हाइटेक टाउनशिप लिमिटेड को खरीदार की जमा राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा की पीठ ने की। शिकायतकर्ता सतेंद्र अग्रवाल, जो नोएडा के सेक्टर-22 के निवासी हैं, ने आयोग को बताया कि वह अंसल हाइटेक टाउनशिप लिमिटेड के प्रतिनिधियों के आश्वासन पर फ्लैट खरीदने के लिए तैयार हुए थे। इसके तहत उन्होंने 31 मार्च 2014 को 15 हजार रुपये की बुकिंग राशि चेक के माध्यम से जमा कराई थी। इसके अलावा 250 रुपये का पंजीकरण शुल्क जमा कर परियोजना में अपना पंजीकरण कराया। शिकायत के अनुसार उन्हें ग्रेटर नोएडा स्थित सुशांत मेगापोलिस परियोजना में लगभग 270 वर्ग फीट क्षेत्रफल का आवासीय यूनिट 3.25 लाख रुपये में आवंटित किया गया था। कंपनी ने 10 अप्रैल 2015 को आवंटन पत्र भी जारी कर दिया था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उन्होंने कंपनी की मांग के अनुसार भुगतान किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आज तक भवन का कब्जा नहीं दिया गया। इतना ही नहीं, परियोजना का निर्माण भी पूरा नहीं किया गया और कई वर्षों तक इंतजार करने के बाद भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। सतेंद्र अग्रवाल ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपनी जमा राशि वापस मांगनी शुरू की तो कंपनी ने धनराशि लौटाने से भी इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने न्याय की मांग करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग में सुनवाई के दौरान अंसल हाइटेक टाउनशिप लिमिटेड की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ और न ही कंपनी ने अपना पक्ष रखा। इसके चलते आयोग ने मामले की एकपक्षीय सुनवाई की। उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर आयोग ने माना कि बिल्डर ने शिकायतकर्ता से धनराशि लेने के बावजूद न तो समय पर भवन तैयार किया और न ही कब्जा सौंपा। यह उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत सेवा में स्पष्ट कमी की श्रेणी में आता है। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बिल्डर शिकायतकर्ता की जमा धनराशि 1 लाख 762 रुपये को छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 30 दिनों के भीतर वापस करे। इसके अलावा शिकायतकर्ता को हुए मानसिक कष्ट और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए एक-एक हजार रुपये अतिरिक्त देने का भी निर्देश दिया गया है। यह फैसला उन हजारों फ्लैट खरीदारों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, जो वर्षों से परियोजनाओं में देरी और कब्जा न मिलने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आदेश बिल्डरों की जवाबदेही तय करने और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।



