दिल्ली

NMC notice medical colleges: देश के सात मेडिकल कॉलेज MBBS इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों को नहीं दे रहे स्टाइपेंड, एनएमसी ने जारी किए नोटिस

NMC notice medical colleges: देश के सात मेडिकल कॉलेज MBBS इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों को नहीं दे रहे स्टाइपेंड, एनएमसी ने जारी किए नोटिस

नई दिल्ली। मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि देश के सात मेडिकल कॉलेज ऐसे हैं जहां एमबीबीएस इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को निर्धारित स्टाइपेंड का भुगतान नहीं किया जा रहा है। आयोग ने इन संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान सामने आई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और पीबी वराले की पीठ के समक्ष हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता तन्वी दुबे ने अदालत को बताया कि संबंधित सात मेडिकल कॉलेज आंध्र प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, राजस्थान, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थित हैं। इनमें चार सरकारी और तीन निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। एनएमसी के अनुसार देश में कुल 756 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। इनमें से 573 कॉलेजों में स्टाइपेंड भुगतान को लेकर कोई विवाद नहीं पाया गया है। वहीं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित करने वाले 562 मेडिकल कॉलेजों में रेजिडेंट डॉक्टरों को नियमित रूप से स्टाइपेंड दिया जा रहा है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि एक मेडिकल कॉलेज वर्तमान में बंद है, जबकि दो अन्य संस्थानों में इंटर्न नहीं होने के कारण वहां स्टाइपेंड भुगतान का प्रश्न नहीं उठता। यह मामला वर्ष 2022 में दायर एक याचिका से जुड़ा हुआ है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि देश के लगभग 70 प्रतिशत मेडिकल कॉलेज या तो इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों को स्टाइपेंड नहीं देते या फिर निर्धारित मानकों से कम भुगतान करते हैं। याचिका में दिल्ली स्थित आर्मी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसीएमएस) का भी उल्लेख किया गया था, जहां कथित रूप से लगभग 100 इंटर्न को स्टाइपेंड नहीं मिलने का मुद्दा उठाया गया था। एनएमसी ने अदालत को बताया कि 11 जुलाई 2025 को सभी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिया गया था कि वे अपनी वेबसाइट पर एमबीबीएस इंटर्न और पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों को दिए जाने वाले स्टाइपेंड का विवरण सार्वजनिक करें। समीक्षा के दौरान सात कॉलेजों ने बार-बार याद दिलाने के बावजूद आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। आयोग का कहना है कि यह राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम 2019 और पीजीएमईआर-2023 के प्रावधानों का उल्लंघन है। एनएमसी ने कहा है कि संबंधित संस्थानों से जवाब प्राप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई अगस्त में निर्धारित की गई है, जहां आयोग अदालत के समक्ष अपनी कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकता है। यह मामला देशभर के मेडिकल छात्रों, इंटर्न डॉक्टरों और रेजिडेंट चिकित्सकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि स्टाइपेंड उनके प्रशिक्षण और पेशेवर जीवन का एक अहम हिस्सा होता है।

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