Saket Building Collapse: साकेत बिल्डिंग हादसे ने छीनी छह जिंदगियां, मेडिकल छात्रों समेत कैंटीन संचालक की दर्दनाक मौत

Saket Building Collapse: साकेत बिल्डिंग हादसे ने छीनी छह जिंदगियां, मेडिकल छात्रों समेत कैंटीन संचालक की दर्दनाक मौत

नई दिल्ली, 31 मई। दक्षिण दिल्ली के साकेत इलाके में इमारत ढहने की घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में पांच मेडिकल छात्रों सहित कुल छह लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। हादसे के बाद मेडिकल समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

एम्स दिल्ली के जयप्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर और डॉक्टरों के संगठन फाइमा (FAIMA) द्वारा जारी जानकारी के अनुसार मृतकों में कपिल, आलोक, नलिन, रवि प्रकाश सिंह, एकता चौधरी और कैंटीन संचालक पार्वती ओझा शामिल हैं। सभी मृतकों की पहचान की पुष्टि कर दी गई है। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों, सहपाठियों और डॉक्टरों के बीच शोक और चिंता का माहौल फैल गया।

एम्स दिल्ली की प्रवक्ता डॉ. रीमा दादा ने बताया कि हादसे के बाद कुल 13 घायलों को जयप्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया था। इनमें से पांच लोगों को अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत घोषित कर दिया गया। वहीं पांच घायलों का इलाज अस्पताल में जारी है, जबकि तीन लोगों को प्राथमिक उपचार और चिकित्सकीय जांच के बाद छुट्टी दे दी गई है। एक अन्य घायल का इलाज सफदरजंग अस्पताल में चल रहा है, जहां उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

फाइमा ने बताया कि मृतकों में आलोक उत्तर प्रदेश के निवासी थे, जबकि एकता चौधरी राजस्थान के जयपुर की रहने वाली थीं। दोनों मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर रहे थे और अपने भविष्य को लेकर कई सपने संजोए हुए थे। उनके असामयिक निधन से मेडिकल छात्रों और शिक्षकों में गहरा दुख व्याप्त है।

हादसे के बाद डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों ने घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। फाइमा ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों की जिम्मेदारी तय करने और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि ऐसी घटनाएं केवल दुर्घटनाएं नहीं हैं, बल्कि निर्माण सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में मौजूद कमियों की ओर संकेत करती हैं।

साकेत बिल्डिंग हादसे ने एक बार फिर राजधानी दिल्ली में इमारतों की संरचनात्मक मजबूती, निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने और जर्जर भवनों की नियमित जांच तथा निर्माण नियमों के सख्त पालन के बिना ऐसी घटनाओं को रोकना मुश्किल होगा। इस त्रासदी ने कई परिवारों से उनके अपने छीन लिए हैं और पूरे मेडिकल समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है।

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