Uttar Pradesh : मथुरा के गोवर्धन में अधिक मास मेला ; आस्था का सैलाब उमड़ा, यातायात व्यवस्था ध्वस्त

Mathura : मथुरा की धार्मिक नगरी गोवर्धन में अधिक मास के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। देश के कोने-कोने से आए हजारों-लाखों भक्त कनक दंडवत और पैदल चलकर गिरिराज जी की 21 किलोमीटर की कठिन परिक्रमा लगा रहे हैं। चारों ओर ‘गिराज महाराज की जय’ के जयकारों की गूंज है। लेकिन इस भारी भीड़ के बीच स्थानीय प्रशासन के दावों की पोल खुल गई है। मेले के शुरुआती दिनों में ही गोवर्धन की यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जिससे अधिकारियों की लापरवाही साफ उजागर हो रही है।

अधिक मास मेला शुरू होने से पहले प्रशासनिक अधिकारियों ने बड़े-बड़े दावों के साथ कई दौर की बैठकें की थीं और एक सुदृढ़ यातायात योजना तैयार करने का ढिंढोरा पीटा गया था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ये सारे प्लान फेल साबित हुए हैं। परिक्रमा मार्ग से लेकर मुख्य चौराहों तक घंटों लंबा जाम लग रहा है। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी जमीनी व्यवस्था दुरुस्त करने के बजाय केवल वीआईपी बैठकों और फोटो खिंचाने में ही व्यस्त रह गए, जिसका खामियाजा चिलचिलाती धूप और अव्यवस्था के बीच त्रस्त जनता और श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हमेशा मथुरा-वृंदावन के विकास कार्यों और धार्मिक आयोजनों पर विशेष फोकस रहता है। वे ब्रज के विकास के लिए लगातार बजट और योजनाएं स्वीकृत कर रहे हैं। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाएं शून्य बनी हुई हैं।

आक्रोश इस बात को लेकर भी है कि मथुरा जनपद में भारतीय जनता पार्टी के 5 विधायक, सांसद हेमा मालिनी, एमएलसी, राज्यसभा सांसद और जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे बड़े-बड़े जनप्रतिनिधि मौजूद हैं, लेकिन इनमें से किसी भी नेता का ध्यान गोवर्धन मेले में उमड़ने वाली इस भारी भीड़ और बदइंतजामी की ओर नहीं है। सत्तापक्ष के इतने कद्दावर चेहरों की मौजूदगी के बाद भी जनता को मूलभूत सुविधाओं और सुचारू यातायात के लिए तरसना पड़ रहा है। यदि समय रहते प्रशासन ने कड़े कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

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