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Okhla Development: अतिक्रमण हटाकर ओखला में हरित क्षेत्र और छात्रावास परियोजनाओं की तैयारी

Okhla Development: अतिक्रमण हटाकर ओखला में हरित क्षेत्र और छात्रावास परियोजनाओं की तैयारी

रिपोर्ट: रवि डालमिया

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के ओखला क्षेत्र में सिंचाई विभाग की जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार इन क्षेत्रों को हरित विकास और सार्वजनिक उपयोग की बड़ी परियोजनाओं के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। सरकार का फोकस इन जमीनों को पर्यावरण संरक्षण, हरियाली बढ़ाने और जनहित से जुड़ी सुविधाओं के लिए इस्तेमाल करने पर है। इसी कड़ी में भविष्य में यहां उत्तर प्रदेश के छात्रों के लिए छात्रावास निर्माण की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री Swatantra Dev Singh ने बुधवार को ओखला स्थित नव निर्मित “मुख्य अभियन्ता-यमुना” कार्यालय भवन के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान कहा कि सिंचाई विभाग ने पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में अपनी कई महत्वपूर्ण जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। उन्होंने बताया कि ओखला और आगरा नहर क्षेत्र में 10 हेक्टेयर से अधिक भूमि को कब्जा मुक्त कराया गया है, जिसकी मौजूदा सर्किल रेट के अनुसार अनुमानित कीमत करीब 338 करोड़ रुपये है।

मंत्री ने जानकारी दी कि गाजियाबाद के ग्राम कैला में विभाग की 18 एकड़ से अधिक भूमि को भी अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। इस जमीन की अनुमानित कीमत लगभग 2205 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा ओखला क्षेत्र के ग्राम 67 और 68 में करीब 18 हेक्टेयर भूमि को पुनः विभाग के कब्जे में लिया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 1019 करोड़ रुपये आंकी गई है। सरकार का कहना है कि इन जमीनों को सुरक्षित रखते हुए जनहित में उपयोग करने की विस्तृत योजना तैयार की जा रही है।

उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल अवैध कब्जे हटाना नहीं है, बल्कि इन जमीनों का बेहतर और दीर्घकालिक उपयोग सुनिश्चित करना भी है। इसी योजना के तहत जनूबी चरागाह क्षेत्र की 178 हेक्टेयर भूमि को स्थायी अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। यहां वेटलैंड डेवलपमेंट परियोजना पर काम शुरू किया गया है। पहले चरण में 86 हेक्टेयर भूमि पर विकास कार्य शुरू हो चुका है, जबकि आगे दो अन्य चरणों में शेष क्षेत्र को विकसित किया जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए सरकार अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीनों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान भी चला रही है। हाल ही में करीब चार हेक्टेयर क्षेत्र में 3500 पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों में 46 अलग-अलग प्रजातियों के वृक्ष शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इससे क्षेत्र में हरित आवरण तेजी से बढ़ेगा, पर्यावरण संतुलन मजबूत होगा और भविष्य में यह इलाका पर्यटन के लिहाज से भी एक प्रमुख आकर्षण बन सकता है।

जल शक्ति मंत्री ने कहा कि दिल्ली में पढ़ाई के लिए आने वाले उत्तर प्रदेश के छात्रों को अक्सर आवास संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीनों पर छात्रावास जैसी सुविधाएं विकसित करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इन जमीनों का उपयोग जनहित, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार के लिए किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान यमुना परियोजना संगठन की 16 परियोजनाओं का लोकार्पण और जनसमर्पण भी किया गया। विभाग के अनुसार इन परियोजनाओं की कुल स्वीकृत लागत 8803.114 लाख रुपये रही, जबकि 6831.310 लाख रुपये की लागत से कार्य पूरा किया गया। इससे करीब 1971.804 लाख रुपये की बचत भी हुई है। मंत्री ने कहा कि ओखला बैराज और यमुना परियोजना से संचालित नहर नेटवर्क के जरिए उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के कई क्षेत्रों तक पानी पहुंचाया जा रहा है, जिससे करीब दो लाख किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।

 

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