Contract Employees:केंद्र सरकार का बड़ा फैसला! वेतन और PF-ESI में गड़बड़ी करने वाले ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट

Contract Employees:केंद्र सरकार का बड़ा फैसला! वेतन और PF-ESI में गड़बड़ी करने वाले ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट
केंद्र सरकार ने आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब यदि कोई ठेकेदार कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं देता या उनका पीएफ, ईएसआई और अन्य वैधानिक अंशदान जमा नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने ऐसे ठेकेदारों को अधिकतम तीन साल तक सरकारी टेंडरों से प्रतिबंधित करने का प्रावधान लागू किया है। इस फैसले को लाखों ठेका कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने इस संबंध में सभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, स्वायत्त संस्थाओं और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को नए निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार अब ठेका कर्मचारियों का वेतन हर हाल में अगले महीने की 7 तारीख तक उनके बैंक खातों में जमा कराना अनिवार्य होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वेतन भुगतान की प्रक्रिया की निगरानी ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर यानी डीडीओ द्वारा हर महीने की जाएगी।
सरकार के नए नियमों के मुताबिक ठेकेदारों को कर्मचारियों का वेतन देने के बाद 10 तारीख तक संबंधित विभाग में बिल जमा करना होगा। इसके बाद विभागों को 15 तारीख तक भुगतान प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अगर किसी मामले में ठेकेदार वेतन भुगतान में देरी करता है, तो संबंधित विभाग सीधे कर्मचारियों के बैंक खाते में भुगतान कर सकेगा। इससे कर्मचारियों को वेतन के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
केंद्र सरकार ने श्रम कानूनों के पालन को अब सरकारी ठेकों की पात्रता से भी जोड़ दिया है। यानी जो ठेकेदार कर्मचारियों के अधिकारों और श्रम कानूनों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें भविष्य में सरकारी ठेके मिलने में मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। सरकार का मानना है कि इससे ठेका कर्मचारियों को समय पर वेतन, पीएफ और ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं सुनिश्चित हो सकेंगी।
इस फैसले के बाद देशभर के लाखों संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। लंबे समय से कर्मचारी संगठनों की ओर से समय पर वेतन और सामाजिक सुरक्षा लाभों को लेकर शिकायतें सामने आती रही थीं। अब सरकार के इस सख्त कदम से ठेकेदारों की जवाबदेही बढ़ेगी और कर्मचारियों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।





