
Rohtak/New Delhi : दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स में सोमवार को दूसरे दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें 760 छात्रों को ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री प्रदान की गई, जबकि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 35 छात्रों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष ने की। कार्यक्रम में उनकी धर्मपत्नी मित्रा घोष, शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा और ओएसडी डॉ राज नेहरू सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

समारोह की शुरुआत शैक्षणिक शोभा यात्रा के साथ हुई, जिसमें अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया गया। दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना, वंदेमातरम और विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। कुलगुरु डॉ अमित आर्य, रजिस्ट्रार डॉ गुंजन मलिक मनोचा और डीन डॉ अजय कौशिक ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। छात्रों द्वारा बनाए गए पोर्ट्रेट भी अतिथियों को भेंट किए गए।
अपने संबोधन में राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष ने कहा कि यह संस्थान केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि रचनात्मक नेतृत्वकर्ताओं का निर्माण कर रहा है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह ज्ञान, सृजनात्मकता और जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे अपनी कला और संस्कृति के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएं और अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए नवाचार को अपनाएं।
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने विश्वविद्यालय को राज्य की कला, संस्कृति और रचनात्मकता का केंद्र बताते हुए कहा कि यहां से निकलने वाले छात्र केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि संवेदनशील और कुशल नागरिक हैं। उन्होंने छात्रों को रोजगार खोजने के बजाय रोजगार सृजक बनने की प्रेरणा दी और तकनीक के दौर में मानवीय मूल्यों को बनाए रखने पर जोर दिया।
कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो नई जिम्मेदारियों और अवसरों की शुरुआत का संकेत देता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य छात्रों का समग्र विकास करना है, ताकि वे समाज में सकारात्मक योगदान दे सकें। उन्होंने इस आयोजन को उत्सव के रूप में मनाने की परंपरा को आगे बढ़ाने पर बल दिया।
समारोह में प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।




