Electric Vehicles Shimla: कचरा प्रबंधन में बड़ा कदम, शिमला नगर निगम ने शुरू किया इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल

Electric Vehicles Shimla: कचरा प्रबंधन में बड़ा कदम, शिमला नगर निगम ने शुरू किया इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने नगर निगम शिमला के 10 इलेक्ट्रिक कचरा संग्रहण वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह कार्यक्रम हिमाचल प्रदेश सचिवालय से आयोजित किया गया, जहां से इन वाहनों को शहर के विभिन्न हिस्सों में कचरा प्रबंधन के कार्य के लिए भेजा गया। इस पहल के साथ नगर निगम शिमला राज्य का पहला शहरी स्थानीय निकाय बन गया है, जिसने चरणबद्ध तरीके से अपने पारंपरिक डीजल-पेट्रोल वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की दिशा में ठोस शुरुआत की है।
नगर निगम शिमला द्वारा इन इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करने से न केवल शहर में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि कचरा प्रबंधन प्रणाली को भी अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाया जा सकेगा। इन वाहनों को लागू करने से पहले नगर निगम ने 10 से 14 नवंबर, 2025 तक इनका परीक्षण भी किया था, जिसमें इन वाहनों ने शिमला की कठिन भौगोलिक बनावट और ठंडे मौसम की परिस्थितियों में सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया। परीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि ये वाहन शहर की ऊंचाई, ढलानों और संकरी सड़कों पर भी बिना किसी समस्या के कार्य कर सकें।
प्रत्येक इलेक्ट्रिक वाहन की कचरा संग्रहण क्षमता लगभग एक टन है, जिससे शहर के विभिन्न वार्डों में नियमित और सुचारु रूप से कचरा उठाया जा सकेगा। इन वाहनों को लगभग 13.98 लाख रुपये की लागत से खरीदा गया है, जो कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण से नगर निगम के लिए एक किफायती निवेश साबित होगा। इसके साथ ही इन वाहनों के संचालन के लिए नगर निगम के पार्किंग परिसर में चार्जिंग अवसंरचना भी स्थापित की गई है, जिससे इनकी चार्जिंग प्रक्रिया को आसान और व्यवस्थित बनाया जा सके।
इन इलेक्ट्रिक वाहनों की एक बड़ी विशेषता यह है कि एक बार पूरी तरह चार्ज होने पर ये लगभग 130 से 150 किलोमीटर तक चल सकते हैं, जो कि शहर के दैनिक कचरा संग्रहण कार्यों के लिए पर्याप्त है। इससे ईंधन पर होने वाला खर्च भी काफी हद तक कम होगा और नगर निगम की आर्थिक स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस अवसर पर नगर निगम शिमला की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसे सरकार के पहले बजट में ही प्राथमिकता दी गई थी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को हरित राज्य बनाने के उद्देश्य से कई योजनाएं लागू की जा रही हैं और इलेक्ट्रिक वाहनों का यह कदम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने यह भी कहा कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि आर्थिक रूप से भी यह एक समझदारी भरा निर्णय है।
इस मौके पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह, नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल सहित कई पार्षद और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को शहर के लिए एक सकारात्मक और भविष्य उन्मुख कदम बताया।