Cardiology Doctors Boost: देश में कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों की कमी दूर करने की दिशा में बड़ा कदम, 1706 डॉक्टरों को मिली मान्यता

Cardiology Doctors Boost: देश में कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों की कमी दूर करने की दिशा में बड़ा कदम, 1706 डॉक्टरों को मिली मान्यता

देश में हृदय रोग विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। National Medical Commission ने IGNOU के पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन क्लीनिकल कार्डियोलॉजी (PGDCC) को आधिकारिक मान्यता दे दी है। करीब दो दशकों से लंबित इस फैसले के बाद अब इस कोर्स को पूरा करने वाले डॉक्टरों को ‘नॉन-इनवेसिव क्लीनिकल कार्डियो फिजिशियन’ के रूप में मान्यता मिलेगी, जिससे देश में प्रशिक्षित कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों की संख्या बढ़ेगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से खासतौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों में हृदय रोगों के इलाज में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। वर्तमान में भारत में कुल मौतों में लगभग 28 प्रतिशत मौतें हृदय संबंधी बीमारियों के कारण होती हैं, जबकि देश में केवल 5 से 6 हजार के बीच कार्डियोलॉजिस्ट उपलब्ध हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में विशेषज्ञों की कमी के चलते मरीजों को समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाता।

PGDCC एक दो वर्षीय विशेष कोर्स है, जो एमबीबीएस डॉक्टरों को नॉन-इनवेसिव कार्डियोलॉजी और प्रिवेंटिव केयर में प्रशिक्षित करता है। इसके माध्यम से डॉक्टर शुरुआती स्तर पर ही हृदय रोगों की पहचान और प्रबंधन करने में सक्षम हो पाते हैं, जिससे गंभीर स्थितियों को समय रहते नियंत्रित किया जा सकता है।

अब तक देशभर में 1706 से अधिक डॉक्टर इस कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं, जिन्हें इस नई मान्यता के बाद औपचारिक पहचान मिल गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बड़े अस्पतालों पर दबाव कम होगा और मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।

इस पहल को भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ा सुधार माना जा रहा है, जो आने वाले समय में हृदय रोगों से होने वाली मौतों को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है। साथ ही यह कदम देश में चिकित्सा सेवाओं के विकेंद्रीकरण और पहुंच को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

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