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AIIMS De-Addiction: दवा के साथ ध्यान और काउंसलिंग से मिलेगी नशे से मुक्ति

AIIMS De-Addiction: दवा के साथ ध्यान और काउंसलिंग से मिलेगी नशे से मुक्ति

नशे की बढ़ती समस्या के बीच अब इलाज के तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। केवल दवाओं के सहारे नशे की लत छुड़ाने की पुरानी सोच को पीछे छोड़ते हुए अब एक समग्र और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में एम्स दिल्ली के राष्ट्रीय औषधि निर्भरता उपचार केंद्र (एनडीडीटीसी) ने नई पहल करते हुए दवा के साथ ध्यान, काउंसलिंग और पुनर्वास को भी उपचार का अहम हिस्सा बनाने का निर्णय लिया है।

एम्स के 38वें स्थापना दिवस के अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने अपने वीडियो संदेश में स्पष्ट कहा कि नशे की लत एक जटिल समस्या है, जिसका असर केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे में इलाज केवल दवाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहारिक सुधार और सामाजिक पुनर्वास पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने यह भी बताया कि ‘नशा मुक्त भारत’ अभियान देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य से जुड़ा हुआ है। इस मिशन में एनडीडीटीसी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, जो नीति निर्माण, प्रशिक्षण और शोध के माध्यम से देशभर में नशा उपचार सेवाओं को मजबूत कर रहा है। साथ ही उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों से भी इस केंद्र की विशेषज्ञता का लाभ उठाने की अपील की।

स्वास्थ्य मंत्रालय के उप महानिदेशक डॉ. सेंथिलनाथन एस. ने भी एनडीडीटीसी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र लगातार अपनी सेवाओं का विस्तार कर रहा है। इसमें बाह्य और भर्ती मरीजों के इलाज, अत्याधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं और सामुदायिक कार्यक्रमों को मजबूत किया गया है, जिससे अधिक से अधिक लोगों तक इलाज की पहुंच सुनिश्चित हो सके।

एनडीडीटीसी ने खास तौर पर महिलाओं, किशोरों, दोहरी मानसिक और शारीरिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और व्यवहार संबंधी लत के लिए विशेष क्लीनिक शुरू किए हैं। इसके साथ ही 50 बिस्तरों वाली इनडोर सुविधा को और बेहतर बनाया जा रहा है और एक नया विशेष वार्ड भी तैयार किया जा रहा है, जिससे गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।

इलाज को और सुलभ बनाने के लिए मोबाइल मेथाडोन सेवाएं और सामुदायिक पहुंच कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं। इन प्रयासों के जरिए दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक भी नशा मुक्ति सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। इससे मरीजों को समय पर इलाज मिल रहा है और उनकी रिकवरी की संभावना भी बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दवा, ध्यान, काउंसलिंग और सामाजिक पुनर्वास को एक साथ जोड़कर ही नशे की समस्या का प्रभावी समाधान संभव है। यह समग्र दृष्टिकोण न केवल मरीज को नशे से दूर करता है, बल्कि उसे एक स्वस्थ और सामान्य जीवन की ओर भी वापस लाने में मदद करता है।

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