Noida Violence Aftermath: योगी सरकार का बड़ा कदम, मजदूर-उद्योग विवाद सुलझाने को हाई लेवल कमेटी गठित

Noida Violence Aftermath: योगी सरकार का बड़ा कदम, मजदूर-उद्योग विवाद सुलझाने को हाई लेवल कमेटी गठित
नोएडा में वेतन वृद्धि और न्यूनतम मजदूरी को लेकर भड़की हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने हालात को नियंत्रित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर राज्य सरकार ने मजदूरों और उद्योगों के बीच बढ़ते विवाद को सुलझाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जिसका उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों में स्थिरता और शांति बनाए रखना है।
सरकार द्वारा गठित इस कमेटी की जिम्मेदारी औद्योगिक विकास आयुक्त को सौंपी गई है। इसके अलावा अपर मुख्य सचिव (एमएसएमई) और प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन को भी समिति में शामिल किया गया है। खास बात यह है कि इस कमेटी में श्रमिक संगठनों के पांच प्रतिनिधि और उद्योग संगठनों के तीन प्रतिनिधि भी शामिल किए गए हैं, ताकि सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके और आपसी संवाद के जरिए समाधान निकाला जा सके।
सरकार का मानना है कि यह समिति मजदूरों और उद्योगों के बीच तालमेल बनाकर विवादों को बातचीत के माध्यम से सुलझाएगी, जिससे भविष्य में इस तरह के उग्र प्रदर्शन और हिंसा की घटनाओं को रोका जा सके। हाल ही में नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में हुए बवाल ने प्रशासन और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी थी, जिसके बाद यह अहम कदम उठाया गया है।
मजदूरों की मांगों पर नजर डालें तो नोएडा-ग्रेटर नोएडा की गारमेंट फैक्ट्रियों में काम करने वाले कर्मचारी हरियाणा की तर्ज पर वेतन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा वेतन में गुजारा करना मुश्किल हो गया है और एक ही काम के लिए अलग-अलग कर्मचारियों को अलग वेतन दिया जा रहा है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है।
प्रदर्शनकारी श्रमिक हरियाणा के न्यूनतम वेतनमान के अनुसार वेतन लागू करने की मांग कर रहे हैं, जिसमें अकुशल श्रमिकों के लिए ₹15,220, अर्ध-कुशल के लिए ₹16,780, कुशल के लिए ₹18,500 और उच्च कुशल श्रमिकों के लिए ₹19,425 प्रति माह वेतन की मांग शामिल है। इसके अलावा मजदूरों ने वेतन में समानता, समय पर भुगतान, ओवरटाइम का नियमों के अनुसार दोगुना भुगतान, महीने में चार अवकाश और बिना कारण नौकरी से न निकाले जाने जैसी प्रमुख मांगें भी रखी हैं।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि श्रमिकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ औद्योगिक विकास को भी प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। ऐसे में यह कमेटी दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाकर एक स्थायी समाधान निकालने की दिशा में काम करेगी।
फिलहाल प्रशासन का फोकस स्थिति को पूरी तरह सामान्य करने और औद्योगिक क्षेत्रों में शांति बहाल करने पर है। माना जा रहा है कि इस कमेटी के गठन से मजदूरों और उद्योगों के बीच संवाद की प्रक्रिया मजबूत होगी और आने वाले समय में ऐसे विवादों को समय रहते सुलझाया जा सकेगा।




