IOS Sagar 2026: Maritime Security IOS Sagar 2026 मुंबई से हरी झंडी, 17 देशों की भागीदारी के साथ बड़ा अभियान शुरू

IOS Sagar 2026: Maritime Security IOS Sagar 2026 मुंबई से हरी झंडी, 17 देशों की भागीदारी के साथ बड़ा अभियान शुरू
नई दिल्ली/मुंबई, 2 अप्रैल : भारतीय नौसेना की बहुप्रतीक्षित पहल ‘आईओएस सागर 2026’ (हिंद महासागर पोत सागर) के दूसरे संस्करण की औपचारिक शुरुआत मुंबई के नेवल डॉकयार्ड से हो गई है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इस महत्वपूर्ण बहुराष्ट्रीय समुद्री मिशन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पहल को हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस मिशन की खास बात यह है कि इसमें भारत समेत कुल 17 देशों के नौसैनिक कर्मी शामिल हैं, जिन्होंने संयुक्त रूप से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य समुद्र में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक क्षमता विकसित करना और आपसी तालमेल को और मजबूत बनाना है। बदलते वैश्विक हालात और समुद्री खतरों को देखते हुए इस तरह के बहुराष्ट्रीय अभ्यासों की अहमियत लगातार बढ़ रही है।
आईओएस सागर 2026 मिशन के तहत भारतीय नौसेना का प्रमुख पोत आईएनएस सुनयना अगले 50 दिनों तक दक्षिण-पूर्वी हिंद महासागर क्षेत्र में सक्रिय रूप से तैनात रहेगा। इस दौरान विभिन्न देशों की नौसेनाओं के साथ समन्वय, अभ्यास और रणनीतिक सहयोग को और बेहतर किया जाएगा। यह तैनाती न केवल भारत की समुद्री उपस्थिति को मजबूत करेगी बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता में भी योगदान देगी।
नौसेना प्रमुख ने अपने संबोधन में वैश्विक परिदृश्य की जटिलताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्थिरता, पश्चिम एशिया में जारी संकट और समुद्री संसाधनों को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियां सामने हैं। ऐसे में सहयोगात्मक समुद्री अभियानों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2025 के दौरान हिंद महासागर क्षेत्र में करीब 3,700 समुद्री घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि एक अरब डॉलर से अधिक की अवैध ड्रग्स जब्त की गई, जो समुद्री सुरक्षा के बढ़ते खतरों की ओर इशारा करती हैं।
आईओएस सागर पहल का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और साझेदारी को बढ़ावा देना है। यह पहल भारत के ‘महासागर’ विजन के तहत क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने का काम करेगी। इस मिशन के माध्यम से भारत न केवल अपनी समुद्री ताकत को प्रदर्शित कर रहा है बल्कि वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार और भरोसेमंद साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को भी मजबूत कर रहा है।
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