Greater Noida Court Dispute: कचहरी में अधिवक्ताओं के दो गुट, कहीं काम जारी तो कहीं धरना-प्रदर्शन

Greater Noida Court Dispute: कचहरी में अधिवक्ताओं के दो गुट, कहीं काम जारी तो कहीं धरना-प्रदर्शन
Greater Noida की कचहरी में अधिवक्ता के साथ मारपीट के मामले ने मंगलवार को बड़ा विवाद खड़ा कर दिया, जिसके चलते अधिवक्ता दो गुटों में बंट गए। एक तरफ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने जिला जज के आश्वासन के बाद न्यायिक कार्य जारी रखने का फैसला लिया, वहीं दूसरे गुट ने विरोध करते हुए कामकाज का बहिष्कार कर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी बोड़ाकी और महासचिव शोभाराम चंदीला ने बताया कि पीड़ित अधिवक्ता से जिला जज द्वारा तहरीर ले ली गई है और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। इसी आश्वासन के आधार पर अधिवक्ताओं ने सामान्य रूप से न्यायिक कार्य जारी रखा। उन्होंने साफ किया कि बार एसोसिएशन की ओर से किसी भी तरह की हड़ताल की घोषणा नहीं की गई थी।
बार पदाधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग बार की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि दोषियों को सजा दिलाने के लिए वे पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन किसी भी तरह के षड्यंत्र को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
वहीं, अधिवक्ताओं के दूसरे गुट ने इस रुख का कड़ा विरोध किया। नीरज भाटी और श्याम सिंह भाटी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने पीड़ित अधिवक्ता फरीद अहमद के समर्थन में एकजुटता दिखाई और घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
आक्रोशित अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से दूरी बनाकर कचहरी परिसर में धरना दिया और विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस के प्रवेश पर भी रोक लगा दी। इस दौरान जमकर नारेबाजी की गई और बड़ी संख्या में अधिवक्ता धरना स्थल पर डटे रहे।
प्रदर्शन के दौरान बार एसोसिएशन के वर्तमान अध्यक्ष और सचिव के खिलाफ भी अधिवक्ताओं में नाराजगी खुलकर सामने आई। कई अधिवक्ताओं ने उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके बहिष्कार की घोषणा कर दी।
आंदोलन को संगठित रूप देने के लिए विरोध कर रहे अधिवक्ताओं ने ‘अधिवक्ता सम्मान बचाओ संघर्ष समिति, गौतमबुद्ध नगर’ का गठन किया। समिति के अध्यक्ष के रूप में अनिल भाटी एडवोकेट और सचिव के रूप में फरीद अहमद को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिससे न्यायिक कार्य पर व्यापक असर पड़ सकता है।





