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Noida Jarcha Murder Case: बहनोई की हत्या में पति-पत्नी को उम्रकैद, अदालत ने लगाया जुर्माना

Noida Jarcha Murder Case: बहनोई की हत्या में पति-पत्नी को उम्रकैद, अदालत ने लगाया जुर्माना

नोएडा के जारचा थाना क्षेत्र के सलारपुर गांव में करीब सात साल पहले हुई बहनोई की हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पति-पत्नी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यदि जुर्माना अदा नहीं किया जाता है तो उन्हें छह महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।

यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चन्द्र मोहन श्रीवास्तव की अदालत ने सुनाया। अदालत ने सलारपुर गांव निवासी आरोपी अली हसन और उसकी पत्नी गुलशन उर्फ हाजरा को हत्या का दोषी पाया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।

एडीजीसी क्राइम नितिन त्यागी के अनुसार यह घटना 7 नवंबर 2018 की सुबह की है। उस दिन सलारपुर गांव स्थित एक ईंट भट्टे के पास बने कमरे में सलीमुद्दीन उर्फ सलीम की हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद भट्टे के मुनीम ने जारचा थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए पुलिस को पूरी जानकारी दी थी।

शिकायत में बताया गया था कि वह सुबह ईंट भट्टे का काम देखने के लिए अली हसन को बुलाने उसके कमरे पर पहुंचे थे। जब वह कमरे के अंदर गए तो उन्होंने देखा कि सलीमुद्दीन खून से लथपथ जमीन पर पड़ा हुआ है। यह देखकर मौके पर हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।

घटना के समय अली हसन का छोटा बेटा भी वहीं मौजूद था। बच्चे ने बताया कि उसके माता-पिता ने मिलकर उसके फूफा सलीमुद्दीन पर कुल्हाड़ी और डंडों से हमला किया था, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए थे।

सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और घटनास्थल से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए। पुलिस ने खून से सनी मिट्टी, टूटी हुई चूड़ियों के टुकड़े और अन्य सामग्री जब्त की। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान पाए गए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि उसकी बेहद निर्मम तरीके से हत्या की गई थी। पुलिस ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। अदालत ने माना कि यह हत्या का गंभीर मामला है, लेकिन इसे दुर्लभतम श्रेणी का अपराध नहीं माना जा सकता। इसलिए आरोपियों को मृत्युदंड देने के बजाय आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

अदालत के फैसले के साथ ही करीब सात साल पुराने इस हत्या मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी हुई और दोषियों को सजा मिल गई।

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