Medanta Chest Trauma Support: नोएडा समेत वेस्ट यूपी में शुरू हुई 24×7 चेस्ट ट्रॉमा सपोर्ट सेवा

Medanta Chest Trauma Support: नोएडा समेत वेस्ट यूपी में शुरू हुई 24×7 चेस्ट ट्रॉमा सपोर्ट सेवा

भारत में हर दिन सड़क हादसों में 450 से अधिक लोगों की जान चली जाती है और इनमें बड़ी संख्या उन मामलों की होती है, जहां समय पर चेस्ट ट्रॉमा का सही इलाज नहीं मिल पाता। ऐसे हालात में एक-एक मिनट बेहद कीमती होता है। इसी जरूरत को देखते हुए मेदांता ने नोएडा समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 24 घंटे काम करने वाली चेस्ट ट्रॉमा सपोर्ट सेवा की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य फ्रंटलाइन हेल्थकेयर सुविधाओं में काम कर रहे डॉक्टरों को तुरंत विशेषज्ञ क्लिनिकल गाइडेंस उपलब्ध कराना है, ताकि गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सके।

मेदांता की यह सेवा पूरी तरह निशुल्क होगी और इसका संचालन इंस्टीट्यूट ऑफ चेस्ट सर्जरी, मेदांता के चेयरमैन डॉ. अरविंद कुमार के नेतृत्व में किया जाएगा। इस सपोर्ट सिस्टम के जरिए किसी भी अस्पताल या ऑनग्राउंड मेडिकल टीम को चेस्ट ट्रॉमा से जुड़े मामलों में तत्काल मेदांता के अनुभवी विशेषज्ञों से संपर्क करने की सुविधा मिलेगी। डॉक्टर मरीज की स्थिति पर चर्चा कर तुरंत सही इलाज की दिशा में निर्णय ले सकेंगे, जिससे इलाज में होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा।

मेदांता के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. नरेश त्रेहन ने कहा कि मेदांता में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इंस्टीट्यूट ऑफ चेस्ट सर्जरी मौजूद है और इस पहल से प्राइमरी व सेकेंडरी हेल्थकेयर सेंटरों को बड़ी मदद मिलेगी। ऐसे अस्पताल, जहां अनुभवी चेस्ट सर्जन हर समय उपलब्ध नहीं होते, वहां के डॉक्टर इस सेवा के माध्यम से विशेषज्ञ मार्गदर्शन लेकर मरीजों का बेहतर इलाज कर सकेंगे।

यह चेस्ट ट्रॉमा सपोर्ट सेवा चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगी और इसे चेस्ट सर्जरी कंसल्टेंट्स की टीम संचालित करेगी, ताकि किसी भी समय एक्सपर्ट गाइडेंस मिल सके। शुरुआती चरण में इस सेवा को हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक साथ लागू किया गया है। भविष्य में इसकी सफलता और जरूरत को देखते हुए इसे देश के अन्य हिस्सों में भी विस्तार देने की योजना है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत में 15 से 45 वर्ष की उम्र के लोगों में मौत का एक प्रमुख कारण सड़क दुर्घटनाएं हैं। अस्पताल में भर्ती होने वाले कुल ट्रॉमा मरीजों में लगभग 10 से 15 प्रतिशत मरीज चेस्ट ट्रॉमा से पीड़ित होते हैं, जबकि पॉली-ट्रॉमा के मामलों में यह आंकड़ा करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। चेस्ट ट्रॉमा का इलाज इसलिए भी जटिल होता है क्योंकि इस हिस्से में फेफड़े, दिल, श्वासनली, आहार नली और प्रमुख रक्त वाहिनियां जैसी महत्वपूर्ण संरचनाएं होती हैं।

बड़े शहरों के बाहर थोरेसिक ट्रॉमा सेंटर, प्रशिक्षित विशेषज्ञ और इंटीग्रेटेड ट्रॉमा सिस्टम की कमी के कारण अक्सर इलाज में देरी हो जाती है, जिससे मरीज की हालत और गंभीर हो जाती है। मेदांता की यह नई पहल ऐसे ही क्षेत्रों में समय पर विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध कराकर चेस्ट ट्रॉमा से होने वाली मौतों को कम करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

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