Pulse Examination: आधुनिक नैदानिक प्रैक्टिस में नाड़ी परीक्षा बनी निर्णायक उपकरण: एआईआईए कार्यशाला

Pulse Examination: आधुनिक नैदानिक प्रैक्टिस में नाड़ी परीक्षा बनी निर्णायक उपकरण: एआईआईए कार्यशाला
नई दिल्ली, 6 फरवरी: अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) के रोग निदान एवं विकृति विज्ञान (आरएनवीवी) विभाग में शुक्रवार को नाड़ी परीक्षा पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में दिल्ली-एनसीआर और पड़ोसी राज्यों हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश के 19 आयुर्वेद महाविद्यालयों के शिक्षक और शोधार्थी शामिल हुए। कार्यशाला का उद्देश्य नाड़ी परीक्षा के व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक पहलुओं को उजागर करना और इसे आधुनिक नैदानिक प्रैक्टिस में प्रभावी रूप से लागू करना था।
एआईआईए के निदेशक प्रो. (वैद्य) पी. के. प्रजापति ने इस अवसर पर कहा कि नाड़ी परीक्षा केवल शास्त्रीय आयुर्वेदिक निदान पद्धति नहीं है, बल्कि यह आज की आधुनिक नैदानिक प्रैक्टिस में भी अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने जोर दिया कि व्यावहारिक एवं साक्ष्य-आधारित निदान कौशल को सुदृढ़ करने के लिए नाड़ी परीक्षा को शैक्षणिक रूप से मजबूत किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, नाड़ी तरंगिणी ऐप जैसी नवीन तकनीकों के समावेश से नाड़ी परीक्षा के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण को बढ़ावा दिया जा सकता है।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को नाड़ी परीक्षा की व्याख्यात्मक तकनीकों, पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक निदान दृष्टिकोण के साथ समन्वय करने के तरीकों पर प्रशिक्षित किया गया। लाइव डेमोंस्ट्रेशन, केस-आधारित चर्चाएँ और संवादात्मक सत्रों के माध्यम से शिक्षकों और शोधार्थियों को नाड़ी परीक्षा का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। इस पहल से शोधार्थियों और चिकित्सकों को नाड़ी परीक्षा के सही उपयोग और इसे मुख्यधारा की चिकित्सा प्रणाली में एकीकृत करने की दिशा में मार्गदर्शन मिला।
इस कार्यशाला को आयुर्वेदिक शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक ज्ञान के बीच सेतु का काम करेगा और नाड़ी परीक्षा की भूमिका को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।
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