
RML Hospital: घुटने की समस्या से पीड़ित युवती को ‘ऑटोग्राफ्ट प्रक्रिया’ से मिली राहत
नई दिल्ली, 22 जनवरी 2026: घुटने में गंभीर दर्द और मेनिस्कस की चोट से पीड़ित 30 वर्षीय युवती को राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल के अस्थि रोग विभाग ने ऑटोग्राफ्ट प्रक्रिया के माध्यम से राहत दी है। इस प्रक्रिया में महिला के अपने शरीर से निकाले गए टेंडन को घुटने के क्षतिग्रस्त मेनिस्कस की जगह प्रत्यारोपित किया गया। ओपन सर्जरी के जरिए घुटने की विकृति को फ्रेम लगाकर सही किया गया।
महिला ने पहले अन्य अस्पताल में सर्जरी करवाई थी, लेकिन सफल नहीं हुई। इसके बाद आरएमएल अस्पताल के विशेषज्ञों ने मेनिसेक्टोमी प्रक्रिया अपनाई। विभागाध्यक्ष डॉ. राहुल खरे ने बताया कि मेनिस्कस क्षतिग्रस्त होने पर लंबे समय तक इलाज न किया जाए तो मरीज को गठिया (आर्थराइटिस) जैसी गंभीर समस्या हो सकती है, क्योंकि घुटने में सही रक्त प्रवाह नहीं होता। विदेशों में ऐसे मामलों में डोनेट किए गए मेनिस्कस का उपयोग किया जाता है, लेकिन भारत में यह आम नहीं है। इस कारण आरएमएल के ऑर्थोपेडिक सर्जनों ने महिला के अपने टेंडन को मेनिस्कस के रूप में प्रत्यारोपित किया, जिससे उसे भविष्य में गठिया से बचाया जा सकेगा।
डॉ. खरे ने बताया कि मेनिस्कस घुटने के जोड़ में जांघ और पिंडली की हड्डियों के बीच मौजूद ‘सी’ आकार का रबर जैसा कार्टिलेज पैड होता है। यह घुटने को स्थिरता देता है, हड्डियों को घिसने से बचाता है और शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करता है। ऑटोग्राफ्ट प्रक्रिया के तहत सेमिटेंडिनोसस टेंडन को मेनिस्कस के आकार में ढालकर घुटने में प्रत्यारोपित किया जाता है, जिससे घुटने की कार्यक्षमता लौटती है और ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा कम होता है।
यह सर्जरी डॉ. प्रणय गुप्ता, डॉ. रवि रंजन और डॉ. मोहित राज ने 13 जनवरी को चिकित्सा निदेशक डॉ. अशोक कुमार और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विवेक दीवान के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न की। आरएमएल अस्पताल अब स्पोर्ट्स इंजरी से पीड़ित मरीजों के लिए भी एक विशेषज्ञ केंद्र बन गया है।
घुटने की इस प्रकार की चोट अक्सर खेलों और भारी गतिविधियों में पाई जाती है। इस प्रक्रिया से युवा मरीजों को उनके घुटनों की क्षमता बनाए रखने और भविष्य में गंभीर रोगों से बचने में मदद मिलती है।





