Wildlife Conservation: ट्रेड शो में युवाओं ने जानी यूपी की वन्यजीव और वनस्पति संपदा, वन विभाग का आउटलेट बना आकर्षण का केंद्र
नोएडा। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के पांचों दिन वन विभाग का आउटलेट युवाओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा। ट्रेड शो के अंतिम दिन भी बड़ी संख्या में पहुंचे युवाओं ने उत्तर प्रदेश की वन्यजीव, वनस्पति और वन संपदा से जुड़ी जानकारी हासिल की। अन्य आउटलेट जहां कारोबार, उद्योग और उत्पादों से जुड़ी जानकारी दे रहे थे, वहीं वन विभाग के आउटलेट ने युवाओं को प्रदेश की प्राकृतिक संपदा और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का काम किया।
मेरठ की छात्रा सुनैना ने बताया कि ट्रेड शो में वन विभाग के आउटलेट पर पहुंचकर उसे पहली बार उत्तर प्रदेश की वन संपदा के बारे में इतने व्यापक स्तर पर जानकारी मिली। उन्होंने सोनभद्र, ललितपुर, लखीमपुर और बहराइच में संचालित 22 वन धन केंद्रों के बारे में भी जानकारी हासिल की। उनके अनुसार, ट्रेड शो के माध्यम से उन्हें अपने ही प्रदेश के बारे में ऐसी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं, जिनके बारे में उन्हें पहले जानकारी नहीं थी।
नोएडा की ओजस्वी ने बताया कि ट्रेड शो में कई आउटलेट कारोबार और विभिन्न उत्पादों से जुड़ी जानकारी दे रहे थे, लेकिन वन विभाग के आउटलेट ने उसे प्रकृति के करीब पहुंचाया। यहां आने के बाद उसे महसूस हुआ कि उत्तर प्रदेश केवल उद्योगों और बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश में वन्यजीवों और पेड़-पौधों की भी व्यापक प्राकृतिक विविधता मौजूद है।
मेरठ के छात्र रवि कुमार ने बताया कि बबूल, सागौन, खैर और अर्जुन जैसे पेड़ उन्होंने अपने आसपास कई बार देखे हैं, लेकिन इन पेड़ों के महत्व और इनके संरक्षण से जुड़ी जानकारी उन्हें ट्रेड शो में आकर मिली। उन्होंने कहा कि अब वह रोज दिखाई देने वाले पेड़ों को पहले की तुलना में अलग नजरिए से देखने की कोशिश करेंगे।
पांच दिन तक चले प्रदर्शन के दौरान मेरठ, लखनऊ और प्रयागराज क्षेत्र की वन संपदा को अलग-अलग तरीके से प्रदर्शित किया गया। युवाओं को प्रदेश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में पाई जाने वाली वनस्पति विविधता के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ क्षेत्र में बबूल, सागौन, खैर और अर्जुन जैसी प्रजातियां प्रमुख रूप से पाई जाती हैं, जबकि प्रदेश के अन्य हिस्सों में अलग-अलग प्रकार की वनस्पतियां और प्राकृतिक विविधता देखने को मिलती है।
वन विभाग के आउटलेट पर प्राकृतिक संपदा के साथ ही वन संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रयासों को भी प्रदर्शित किया गया। युवाओं को वन संरक्षण, वन महोत्सव और प्रदेश में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही आरा मशीनों की संख्या में कमी से जुड़े प्रयासों को भी प्रदर्शित किया गया।
गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होगी हरित पट्टी
ट्रेड शो में गंगा एक्सप्रेसवे के दोनों ओर पौधरोपण और हरित क्षेत्र विकसित करने की योजना से जुड़ी जानकारी भी साझा की गई। इसके जरिए एक्सप्रेसवे के आसपास हरित पट्टी विकसित करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के प्रयासों को सामने रखा गया।
वन विभाग के आउटलेट में औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की जरूरत पर भी जोर दिया गया। पांच दिनों तक चले इस प्रदर्शन ने युवाओं को उत्तर प्रदेश की वन्यजीव और वनस्पति संपदा के साथ-साथ उसके संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों को समझने का अवसर दिया।


