World Preeclampsia Day: वर्ल्ड प्री-एक्लैंपसिया डे: गर्भावस्था में 140/90 से ऊपर बीपी खतरे की घंटी

World Preeclampsia Day: वर्ल्ड प्री-एक्लैंपसिया डे: गर्भावस्था में 140/90 से ऊपर बीपी खतरे की घंटी
नई दिल्ली। All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) के विशेषज्ञों ने वर्ल्ड प्री-एक्लैंपसिया डे के अवसर पर गर्भवती महिलाओं को हाई ब्लड प्रेशर को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। डॉक्टरों के अनुसार गर्भावस्था में 140/90 से अधिक ब्लड प्रेशर को कभी भी सामान्य नहीं मानना चाहिए, क्योंकि यह मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
एम्स के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विशेषज्ञ डॉ. नीना मल्होत्रा, डॉ. के. अपर्णा शर्मा, डॉ. विदुषी कुलश्रेष्ठ और डॉ. अनुभूति राणा ने बताया कि प्री-एक्लैंपसिया गर्भावस्था से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है। इसमें हाई ब्लड प्रेशर के साथ किडनी, लिवर और शरीर के अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार समय पर पहचान और इलाज न होने पर मां को ब्रेन हैमरेज, किडनी फेल्योर, फेफड़ों में पानी भरना और दौरे पड़ने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। वहीं शिशु की वृद्धि रुकने, समय से पहले डिलीवरी और गर्भ में मृत्यु तक का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में हर साल करीब 6 से 8 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं प्री-एक्लैंपसिया से प्रभावित होती हैं। यह समस्या आमतौर पर गर्भावस्था के 20 से 24 सप्ताह के बाद शुरू होती है और 28 सप्ताह के बाद गंभीर रूप ले सकती है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
लगातार तेज सिरदर्द
आंखों के सामने धुंधलापन
हाथ-पैरों में ज्यादा सूजन
अचानक वजन बढ़ना
पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द
डॉक्टरों ने कहा कि शुरुआती तीन महीनों में जांच कर जोखिम वाली महिलाओं की पहचान की जाए तो डॉक्टर की सलाह से लो-डोज एस्पिरिन देकर करीब 60 प्रतिशत मामलों को गंभीर होने से रोका जा सकता है। हालांकि बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा लेने से बचने की सलाह दी गई है।
नियमित जांच सबसे जरूरी
विशेषज्ञों ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान बीपी और यूरिन की नियमित जांच ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। उन्होंने एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। साथ ही प्रसव के बाद कम से कम 12 सप्ताह तक महिलाओं को अपना ब्लड प्रेशर जांचते रहने की सलाह दी गई है।





